शशि थरूर जैसे लोग कुछ सिखाते क्यों नहीं: अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह का तंज
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी सांसदों के आचरण और लोकसभा स्पीकर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नियमों का हवाला दिया।

नई दिल्ली (एजेंसी)। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस समेत विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर चुन-चुनकर प्रहार किए। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि "इस सदन में शशि थरूर जैसे सीनियर लोग बैठे हैं, आखिर आप इन्हें कुछ सिखाते क्यों नहीं हैं?" अमित शाह ने स्पष्ट किया कि "आपके अधिकारों का संरक्षण हो सकता है, लेकिन विशेषाधिकारों के मुगालते में जीना तो गलत है।" उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कांग्रेस ने स्पीकर के पद पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि "आप जिस स्पीकर के संरक्षण से बात करते हैं, यदि उस पर ही सवाल उठा देंगे तो फिर कामकाज कैसे होगा।"
लोकतंत्र में मर्यादा और विपक्ष की भूमिका
गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में बड़े बदलाव आए हैं और भाजपा ने अपनी राजनीतिक यात्रा का ज्यादातर समय विपक्ष में ही गुजारा है। अमित शाह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि "लोकसभा स्पीकरों पर तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन भाजपा ने कभी भी ऐसा नहीं किया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "हमने रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया है और हमने हमेशा स्पीकर के पद की गरिमा रखी है व उसका संरक्षण किया है।" शाह ने आरोप लगाया कि "हमारे सदनों की साख पर विपक्ष ने सवालिया निशाना लगाने का प्रयास किया है।" उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में समाजवादी पार्टी और कम्युंटिस्ट पार्टी जैसे दल इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे।
अध्यक्ष के कर्तव्य और सदन का शिष्टाचार
अमित शाह के अनुसार, "अध्यक्ष का पहला कर्तव्य होता है कि व्यवस्था और शिष्टाचार को बनाए रखे तथा दूसरा कर्तव्य है कि सभी को मौका देना और न्यायपूर्ण बर्ताव करना।" उन्होंने तर्क दिया कि यदि अध्यक्ष शिष्टाचार ही नहीं बनाए रख पाएगा तो वह अपना प्राथमिक कर्तव्य ही पूरा नहीं कर सकेगा। गृह मंत्री ने कहा कि "अब कोई भी व्यक्ति खड़ा हो जाएगा और कुछ भी बोलेगा तो उसे बिठाने में कोई बुराई नहीं है।" उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि "आज यदि मैं स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव पर बोल रहा हूं तो माओवाद देश से समाप्त हो रहा है, इस पर बात नहीं कर सकता; ऐसा करने पर मुझे आप बिठा देंगे तो कुछ गलत नहीं होगा।"
वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सदन के नियम
सदन की परंपराओं पर जोर देते हुए शाह ने फिर दोहराया कि "इस सदन में शशि थरूर और टीआर बालू जैसे सीनियर बैठे हैं, आखिर आप इन्हें सिखाते क्यों नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि "कोई भी मेंबर बोलता है तो स्पीकर को संबोधित करता है और लोकसभा स्पीकर के माध्यम से ही विपक्ष और सत्ता पक्ष एक-दूसरे पर बात करते हैं।" शाह ने सदन के संचालन हेतु नियमों का हवाला देते हुए कहा कि "लोकसभा के नियम 374 में स्पीकर को अधिकार है कि वह अनुशासनहीनता और गलत बर्ताव की स्थिति में चेतावनी दे सकता है और निलंबित भी कर सकता है।"
अव्यवस्था पर कठोर रुख
अमित शाह ने विपक्षी आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि "मुझे लगता है कि सभी इस पर सहमति जताएंगे कि वेल में आएं और कागज फाड़कर स्पीकर पर फेकेंगे तो क्या करना चाहिए।" उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि "किसी के सलाहकार ऐक्टिविस्ट हो सकते हैं और आंदोलनकारी हो सकते हैं, लेकिन सदन में तो नियमों से ही चलना होगा।" अंत में उन्होंने नियमों की शक्ति को रेखांकित करते हुए बताया कि "गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में नियम 375 के तहत सदन को स्थगित करने का अधिकार स्पीकर के पास है।"

Pratahkal Bureau
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