होटल लीला पर आरोप, मंदिर परिसर से कब्जा हटाने की मांग
श्री नारायणेश्वर महादेव मंदिर नागर घाट पर अवैध कब्जे को लेकर श्रद्धालुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद ने जिला प्रशासन से मंदिर को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।

वीएचपी / विश्व हिंदू परिषद
उदयपुर। प्राचीन धार्मिक धरोहर श्री नारायणेश्वर महादेव मंदिर नागर घाट पर अवैध अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मंदिर परिसर में होटल लीला की ओर से किए गए कथित अतिक्रमण के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और मंदिर को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की।
नागर घाट स्थित यह प्राचीन मंदिर एक स्वयंभू शिवलिंग का धाम है, जहां वर्षों से श्रद्धालु अपनी आस्था अर्पित करते आए हैं। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि अतिक्रमण के चलते मंदिर के मुख्य मार्ग और परिसर तक पहुंच बाधित हो चुकी है। इसी कारण भक्तजन लंबे समय से नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन से वंचित हैं। इससे न केवल धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, बल्कि सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं को गहरी चोट भी पहुंची है।
वीएचपी पदाधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि नगर निगम ने 28 अगस्त को होटल प्रबंधन को अवैध निर्माण व अतिक्रमण हटाने का विधिवत नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। परिषद का कहना है कि प्रशासन की यह चुप्पी आमजन की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है और इससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ज्ञापन सौंपते समय परिषद नेताओं ने जोर देकर कहा कि मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का प्रतीक है। यदि शीघ्र ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो श्रद्धालुओं का आक्रोश और तेज हो सकता है। परिषद ने मांग की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर क्षेत्र को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान परिषद की ओर से महानगर अध्यक्ष सुशील मूंदड़ा, महानगर मंत्री आकाश सोनी, महानगर संयोजक अजय सालवी, विभाग सह मंत्री अशोक प्रजापत, विभाग संयोजक ललित लौहार, धर्मयात्रा प्रमुख सुशील जांगिड़ और सेवा प्रमुख भूपेंद्र गांधी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
यह विवाद केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की सुरक्षा से जुड़ा है। उदयपुर अपने प्राचीन मंदिरों और घाटों की जीवंत परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में यदि श्रद्धालु अपने ही मंदिर में प्रवेश से वंचित रहें, तो यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करती है।
अब सारी निगाहें जिला प्रशासन और नगर निगम पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। मंदिर को अतिक्रमण से मुक्त कर श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोलने का निर्णय न केवल धार्मिक विश्वास की पुनर्स्थापना करेगा, बल्कि प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी साबित करेगा। श्री नारायणेश्वर महादेव मंदिर पर छाया यह विवाद उदयपुरवासियों के लिए आस्था और अधिकार दोनों का प्रश्न बन गया है। श्रद्धालु उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी पुकार सुनी जाएगी और जल्द ही मंदिर में पुनः घंटियों की गूंज और आरती की ध्वनि प्रतिध्वनित होगी।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
