देवास उदयपुर में 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रभक्ति का सैलाब: 'पंच परिवर्तन' से विकसित भारत के निर्माण का शंखनाद
उदयपुर के देवास में स्थित श्री फूलचंद लोढ़ा आदर्श विद्या मंदिर में 77वाँ गणतंत्र दिवस अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के संरक्षक गोपाल जी कुमावत ने 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण और संविधान के महत्व का संदेश दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और देशभक्ति के संकल्प के साथ संपन्न हुए इस भव्य आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

देवास (उदयपुर)। मेवाड़ की पावन धरा पर संविधान के सम्मान और राष्ट्र निर्माण के अटूट संकल्प के साथ 77वाँ गणतंत्र दिवस समारोह अपनी पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। वनांचल शिक्षा समिति उदयपुर द्वारा संचालित श्री फूलचंद लोढ़ा आदर्श विद्या मंदिर, देवास के प्रांगण में आयोजित इस समारोह ने न केवल देशभक्ति की नई मिसाल पेश की, बल्कि शिक्षा और संस्कारों के संगम से एक सशक्त भारत की तस्वीर भी साफ की। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद ठीक सुबह 8:30 बजे मुख्य अतिथि ने तिरंगा फहराया। जैसे ही ध्वजारोहण हुआ, पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रगान की गूंज और भारत माता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के संरक्षक श्रीमान गोपाल जी कुमावत ने शिरकत की। गरिमामयी मंच पर ग्राम पंचायत देवास की प्रशासक श्रीमती विद्या देवी खंडेरा, पूर्व सरपंच श्री गोपी लाल खराड़ी एवं पूर्व सरपंच श्री कालू लाल खंडेरा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालय के भैया-बहिनों ने अपनी कला और प्रतिभा से समां बांध दिया। देशभक्ति गीतों और समूह नृत्यों की प्रस्तुतियों ने जहाँ दर्शकों की आँखों में गर्व के आँसू ला दिए, वहीं विद्यार्थियों द्वारा भारतीय संविधान की गरिमा, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों पर दिए गए प्रेरणादायक भाषणों ने राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी परिपक्वता को दर्शाया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नन्हे विद्यार्थियों ने समूचे ग्रामवासियों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमान गोपाल जी कुमावत ने संविधान के मर्म को समझाते हुए विद्यार्थियों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के संतुलन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने विशेष रूप से “पंच परिवर्तन” का मंत्र साझा किया, जिसमें स्वयं में सुधार, परिवार में संस्कारों का बीजारोपण, समाज में सकारात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और अंततः राष्ट्र निर्माण के परिवर्तन पर बल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज का विद्यार्थी संस्कारयुक्त और जिम्मेदार बनेगा, तभी एक समरस और विकसित भारत का सपना साकार होगा। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में भामाशाहों द्वारा प्रदान की गई सहयोग सामग्री का वितरण किया गया, जो सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बना। अंत में प्रधानाध्यापक श्री नेपाल सिंह झाला ने सभी अतिथियों और ग्रामवासियों का आभार जताया। समारोह के पश्चात श्री कुमावत ने आचार्यों की बैठक लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता और आगामी योजनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया, जो विद्यालय के भविष्य के प्रति एक ठोस दृष्टि को दर्शाता है।

Pratahkal Bureau
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