मेनार में राहत की सांस: साढ़े चार घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग ने पैंथर को किया ट्रैंकुलाइज
उदयपुर जिले के मेनार में दो सप्ताह से आतंक फैलाने वाले पैंथर को वन विभाग की टीम ने साढ़े चार घंटे के रोमांचक अभियान के बाद ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया। रेस्क्यू टीम की तत्परता और ग्रामीणों के सहयोग से पूरा अभियान सफल रहा, जिससे क्षेत्र में फैले भय का अंत हुआ।

उदयपुर, 13 नवम्बर।
उदयपुर जिले के मेनार में पिछले पखवाड़े से दहशत फैला रहे पैंथर को आखिरकार बुधवार रात वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया। साढ़े चार घंटे तक चले इस रोमांचक और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन ने ग्रामीणों को उस भय से मुक्त कराया, जिसने बीते दो सप्ताह से पूरे क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में लिया हुआ था।
मेनार क्षेत्र में पैंथर लगातार गांवों के आसपास घूमता दिखाई दे रहा था और रात के समय मवेशियों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहा था। इस वजह से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल था, लोग शाम ढलते ही अपने घरों में सिमटने लगे थे। बुधवार रात पैंथर ने गांव के निवासी भगवतीलाल लुणावत के बाड़े में बंधी एक गाय पर हमला कर उसे मार डाला। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वन अधिकारी कैलाश मेनारिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
वनपाल सुरेश मेनारिया, सुरेश गर्ग, वनरक्षक भावेश, राजेंद्र सिंह, मोहन सिंह और भगा रावत ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खोज के दौरान पैंथर कुएं के पास एक गहरे खड्डे में झाड़ियों के बीच दिखाई दिया। वन अधिकारियों ने तुरंत उपवन संरक्षक (उत्तर) उदयपुर को अवगत कराया, जिनके निर्देश पर उड़नदस्ता वन्यजीव रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। रेस्क्यू टीम के अनुभवी शूटर अजीत सिंह राणावत, डीपी शर्मा और जीतेन्द्र सिंह देवड़ा कुछ ही समय में मेनार पहुंचे।
इस बीच पैंथर ग्रामीणों की आवाज से खड्डे में और अंदर चला गया, लेकिन कुछ देर बाद अचानक बाहर निकलकर ग्रामीण देवीलाल रूपावत पर झपट पड़ा, जिससे वह घायल हो गया। टीम ने सतर्कता और सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए पैंथर को ट्रैंकुलाइज करने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने पैंथर को सुरक्षित रूप से पकड़कर उदयपुर के बायोलॉजिकल पार्क भेज दिया।
पैंथर के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और वन विभाग की टीम का आभार व्यक्त किया। इस अभियान में ग्रामीणों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। राजकुमार दौलावत, रमेश रूपावत, ओमप्रकाश दौलावत, हुक्मी चंद सुथार, दिनेश कलावत, ओमप्रकाश कलावत, अनिल रूपावत और शांतिलाल रूपावत सहित अनेक ग्रामीणों ने सर्च ऑपरेशन में सहयोग किया।
वन विभाग के इस सफल अभियान ने न केवल ग्रामीणों को राहत दी, बल्कि यह भी दर्शाया कि समन्वय, धैर्य और तत्परता से किसी भी जंगली खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है। मेनार में अब फिर से सामान्य जीवन लौटने लगा है।
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Pratahkal Bureau
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