नवानिया, उदयपुर। मेवाड़ की वीर प्रसूता धरा पर स्थित उदयपुर जिले के नवानिया गांव में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' ने एक नया इतिहास रच दिया। भक्ति, शक्ति और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम के बीच नवानिया की गलियों में जन सैलाब इस कदर उमड़ा कि हर तरफ केवल भगवा ध्वज और अटूट एकता का दृश्य दिखाई दिया। शौभायात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जिस आत्मीयता से पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, उसने समाज की समरसता और सनातनी संस्कृति की जड़ों की मजबूती को एक बार फिर प्रमाणित कर दिया।

इस गरिमामय आयोजन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम रहे, जिन्होंने अपने ओजस्वी बौद्धिक उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह में नव-ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू समाज का संगठन ही सशक्त और वैभवशाली भारत का असली आधार है। उन्होंने समाज जागरण के इस कार्य को समरसता और एकता के भाव से आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा नववर्ष अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं, बल्कि विक्रम संवत के अनुसार चलता है, जो हमारी प्राचीन काल गणना की श्रेष्ठता का प्रतीक है। निंबाराम ने सनातन धर्म की प्राचीनता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सतयुग, त्रेता और द्वापर के बाद कलयुग में भी हमारी परंपराएं उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए 'पंच परिवर्तन' का मंत्र दिया, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, स्वदेशी जीवन शैली, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के पालन को अनिवार्य बताया।





सम्मेलन को सांवलिया धाम मूगांणा के महंत अनुज दास महाराज का पावन सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। महाराज ने अपने संबोधन में मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को जीवंत करते हुए हाड़ीराणी जैसी वीरांगनाओं और मेवाड़ के महापुरुषों के बलिदान का स्मरण कराया, जिसे सुनकर श्रोताओं में देशप्रेम का ज्वार उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में वल्लभनगर विधायक उदय लाल डांगी, भंवर भट्ट, हिम्मत सिंह झाला और स्थानीय सरपंच जगदीश सेन सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों ने अतिथि के रूप में शिरकत कर आयोजन की शोभा बढ़ाई।

सम्मेलन से पूर्व आयोजित भव्य शौभायात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, जिसमें भगवान और राष्ट्र के महापुरुषों की सजीव झांकियों ने आमजन को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान मातृशक्ति की विशाल उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक चेतना में महिलाओं की भागीदारी सर्वोपरि है। नवानिया सहित भटेवर, रूपावली, रेंठेड़, तारावट, किकावास, बागथल, नेतावला और आसपास के दर्जनों गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को सफल बनाकर यह सिद्ध कर दिया कि हिंदू समाज अब संगठित होकर राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है। यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मेवाड़ की माटी से उठी वह हुंकार थी जो सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय एकता की नई इबारत लिखेगी।

Pratahkal Bureau

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