खेरोदा में आस्था और उल्लास का संगम: चारभुजा नाथ को लगा खींच का भोग, आसमान में सजी पतंगों की सतरंगी चादर
खेरोदा में मकर संक्रांति का पर्व पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। चारभुजा नाथ मंदिर में विशेष पूजा और खींच के भोग के साथ ही दान-पुण्य का सिलसिला चला। युवाओं ने जमकर पतंगबाजी की और बच्चों ने सितोलिया का आनंद लिया। आस्था और उत्सव से जुड़ी पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

खेरोदा। सूर्य के उत्तरायण होते ही समूचा खेरोदा कस्बा आध्यात्मिक ऊर्जा और पारंपरिक उल्लास से सराबोर हो उठा। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आज खेरोदा सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में उत्सव का एक ऐसा स्वरूप देखने को मिला, जहाँ एक ओर मंदिरों में घंटियों की गूँज थी, तो दूसरी ओर आसमान में पेंच लड़ाती पतंगों का रोमांच। श्रद्धा, दान-पुण्य और मेल-मिलाप के इस त्रिवेणी संगम ने समूचे क्षेत्र को हर्षोल्लास के रंग में सराबोर कर दिया।
सुबह की पहली किरण के साथ ही खेरोदा के ऐतिहासिक चारभुजा नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। मर्यादा और परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान चारभुजा नाथ की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया और विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस विशेष अवसर पर आराध्य देव को तिल-गुड़ के साथ-साथ मेवायुक्त 'खींच' का विशेष भोग लगाया गया, जिसकी खुशबू से मंदिर प्रांगण महक उठा। ग्रामीणों ने कतारबद्ध होकर दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आज खेरोदा की सड़कों और छतों पर संस्कृति के जीवंत दृश्य दिखाई दिए। जहाँ एक ओर लोगों ने गायों को हरा चारा खिलाकर और सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया, वहीं दूसरी ओर युवा शक्ति और बचपन अपनी मस्ती में डूबा नजर आया। कस्बे के मोहल्लों में पारंपरिक खेल 'सितोलिया' की धूम रही, जिसमें बच्चों ने अपनी फुर्ती का प्रदर्शन किया। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, कस्बे की छतें युवाओं से भर गईं और 'वो काटा' के शोर के बीच आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया।
भोजन की मेज पर भी मकर संक्रांति का पारंपरिक स्वाद हावी रहा। घरों में विशेष रूप से तैयार किए गए खींच का आनंद परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर लिया, जो आपसी प्रेम और सद्भाव का प्रतीक बना। आस्था के अटूट विश्वास और आधुनिक उत्साह के बीच मनाया गया यह पर्व खेरोदा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता को और अधिक प्रगाढ़ कर गया। संध्या काल तक कस्बे में उत्सव का माहौल बना रहा, जो इस बात का प्रमाण है कि बदलते समय के बावजूद आज भी परंपराएं उतनी ही जीवंत और प्रासंगिक हैं।

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
