उदयपुर। राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ ने सीकर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हाथीदेह के बास में सेवारत फार्मासिस्ट को निलंबित करने के आदेश के विरोध में विरोध प्रदर्शन और उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। संघ ने इस कदम को अनुचित बताया और सरकार से संबंधित प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

उदयपुर में संघ की ओर से संरक्षक सज्जन सिंह राव और करन सिंह मीना की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिलाध्यक्ष और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह राठौड़ बेमला ने बताया कि फार्मासिस्ट के निलंबन से स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि संगठन इस प्रकरण का पुरजोर विरोध करता है और सरकार से आग्रह करता है कि एक समिति का गठन कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि प्रत्येक दवा वितरण केंद्र पर रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य होनी चाहिए। वर्तमान में संस्थान में दवा वितरण केंद्र और स्टोर का चार्ज एक ही कर्मचारी को दिया जाता है, जिससे दवाओं के सही वितरण और मरीजों को दवा के उपयोग की सही जानकारी देने में कठिनाई आती है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि दवा वितरण केंद्र और स्टोर का प्रभार अलग-अलग कर्मियों को दिया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो और मरीजों को उचित मार्गदर्शन मिल सके।

इस अवसर पर संघ के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निलंबित फार्मासिस्ट के प्रकरण में न्यायोचित और निष्पक्ष कार्यवाही की मांग की गई। इस दौरान हेमंत मेनारिया, लोकेश सालवी, दीपिका राणावत, आदित्य जैन सहित अन्य संघ के सदस्य और प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

संगठन ने स्पष्ट किया कि फार्मासिस्टों की नियुक्ति और उनके अधिकारों की रक्षा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि न केवल दवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को दवा के सही उपयोग की जानकारी भी प्रभावी रूप से दी जा सकेगी। संघ का मानना है कि निलंबन जैसे कदमों से स्वास्थ्य प्रणाली में अविश्वास पैदा होता है और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है।

राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ का यह कदम स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों के अधिकारों और मरीजों की सुरक्षा दोनों के प्रति सरकार की जागरूकता बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। संघ ने सरकार से अपील की है कि मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच कर उचित कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित न हो और कर्मचारी अपना कर्तव्य स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से निभा सकें।

इस प्रकरण ने यह भी उजागर किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कर्मचारियों के कार्यभार और जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होना कितना आवश्यक है। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि दवा वितरण केंद्रों और स्टोर की जिम्मेदारी अलग-अलग कर्मचारियों को देने से सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी और मरीजों को भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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