उदयपुर में जलेगा 70 फीट ऊंचा रावण, गांधी ग्राउंड में दिखेगा भव्य आतिशबाज़ी का नजारा
गांधी ग्राउंड में शाम 6.30 बजे के शुभ मुहूर्त पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतले क्रेन की मदद से खड़े किए गए। जैसे ही ये पुतले अपनी पूरी ऊँचाई पर पहुंचे, पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

उदयपुर (वि.)। झीलों की नगरी आज एक बार फिर विजयादशमी के उत्सव की धूम में रंगने को तैयार है। 77वें विजयादशमी महोत्सव का आयोजन इस बार विशेष रूप से किया गया है, जिसे श्री सनातन धर्म सेवा समिति और श्री बिलोचिस्तान पंचायत मिलकर आयोजित कर रहे हैं। इस महोत्सव की खासियत न केवल आयोजन की भव्यता में है, बल्कि इसमें शामिल स्थानीय कला और संस्कृति की झलकियों में भी देखने को मिलेगी।
बुधवार को गांधी ग्राउंड में शाम 6.30 बजे के शुभ मुहूर्त पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल पुतले क्रेन की मदद से खड़े किए गए। जैसे ही ये पुतले अपनी पूरी ऊँचाई पर पहुंचे, पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। आयोजन समिति के सहसंयोजक मनीष डेम्बला ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत एक विशाल शोभायात्रा से होगी, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की अलौकिक झांकियाँ प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
शोभायात्रा की शुरुआत ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ होगी, जो शहर की सड़कों से गुजरते हुए उत्साह और आस्था का अद्वितीय माहौल पैदा करेगी। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय की एकजुटता का भी संदेश देती है।
इस बार तैयार किया गया रावण पुतला लगभग 70 फीट ऊँचा है और इसे बनाने में 100 फीट लंबी बांस की टहनियों का इस्तेमाल किया गया है। पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कटारिया ने बताया कि इस पुतले को आधुनिक आतिशबाज़ी और लाइटिंग इफेक्ट्स से सजाया गया है। रावण दहन के समय होने वाली आतिशबाज़ी का नजारा न केवल मैदान बल्कि आसमान को भी रोशन करेगा, जिससे गांधी ग्राउंड में एक रोमांचक और उत्सवपूर्ण माहौल का अनुभव होगा। संपूर्ण आतिशबाज़ी नगर निगम की देखरेख में संपन्न होगी।
महोत्सव में स्थानीय कलाकार धर्म और संस्कृति से जुड़े सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ पेश करेंगे। इन प्रस्तुतियों में नृत्य, संगीत और नाटक के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। आयोजन समिति ने इस बार सभी सुरक्षा मानकों और भीड़ प्रबंधन के विशेष प्रावधान किए हैं, ताकि जनता सुरक्षित और आनंदपूर्वक इस उत्सव का आनंद ले सके।
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि रावण दहन के साथ ही पूरे महोत्सव का समापन होगा, जिसमें प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी बच्चों और युवाओं के लिए विशेष सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं और खेलकूद गतिविधियों का आयोजन किया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि युवाओं में सामुदायिक सहयोग और खेल भावना का विकास करना भी है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निगम ने इस अवसर पर व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। गांधी ग्राउंड और आसपास के क्षेत्रों में भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं और पार्किंग प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही, आग नियंत्रण के लिए फायर ब्रिगेड और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।
शहरवासियों ने महोत्सव की तैयारी को लेकर उत्साह और श्रद्धा दोनों ही व्यक्त की है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी स्थानीय लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व में भाग लेने के लिए तैयार हैं। आयोजन समिति ने सभी लोगों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और उत्सव को सुरक्षित एवं आनंदमय बनाएं।
इस भव्य महोत्सव का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान में नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और समुदायिक एकजुटता में भी देखा जा सकता है। रावण दहन और उसके साथ होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों में भाईचारा, धर्म और संस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाते हैं। यह आयोजन झीलों की नगरी उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को और भी जीवंत बनाता है और शहर को देशभर में अपनी आस्था और उत्सवधर्मिता के लिए पहचान दिलाता है।
77वें विजयादशमी महोत्सव का यह आयोजन न केवल शहरवासियों के लिए, बल्कि दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और भक्तों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। शाम के समय होने वाली शोभायात्रा और रावण दहन के दौरान आतिशबाज़ी का समां निश्चित रूप से उपस्थित सभी लोगों के लिए अविस्मरणीय रहेगा।
उदयपुर में इस प्रकार के आयोजनों का महत्व धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्य से अधिक है। यह लोगों में आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता और शांति बनाए रखने का संदेश भी देता है। शहर में आयोजित इस भव्य महोत्सव ने यह दिखाया कि सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समुदाय में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाया जा सकता है।
गांधी ग्राउंड में आज रावण दहन के दौरान जो उत्साह और श्रद्धा का माहौल बनेगा, वह आने वाले वर्षों के लिए भी शहरवासियों और आगंतुकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। इस महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि परंपरा और आधुनिक तकनीक का संयोजन किसी भी धार्मिक आयोजन को भव्य और मनोरम बनाने में सक्षम है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
