उदयपुर। मेवाड़ अंचल के पशुपालकों के लिए खुशहाली की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए उदयपुर और सलूंबर जिले में नए पशु चिकित्सालयों के निर्माण की घोषणा की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत उदयपुर में नौ और नवगठित सलूंबर जिले में दो अत्याधुनिक पशु चिकित्सालयों का निर्माण किया जाएगा, जिससे बरसों से अस्थाई भवनों में चल रही चिकित्सा सेवाओं को अब अपना स्थाई और आधुनिक ठिकाना मिलेगा।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने राजस्थान के 39 जिलों में कुल 310 वेटनरी हॉस्पिटल्स के लिए 137.18 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया है। इस पूरी योजना पर कुल 144.15 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें नाबार्ड के साथ राज्य सरकार की भी सहभागिता रहेगी। उदयपुर संभाग के संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ. सुरेश कुमार जैन ने इस परियोजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संपूर्ण कार्य आरआईडीएफ-एक्सएक्सएक्सआई (RIDF-XXXI) के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य न केवल पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालकों को उनके द्वार पर ही बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

परियोजना के विस्तृत विवरण के अनुसार, प्रत्येक चिकित्सालय के निर्माण पर करीब 46.50 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इसमें 44.17 लाख रुपये आरआईडीएफ के माध्यम से तीन किस्तों में प्राप्त होंगे, जबकि शेष 2.33 लाख रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। उदयपुर जिले में जिन स्थानों का चयन किया गया है, उनमें झाड़ोल की ग्राम पंचायत गोराणा, फलासिया की ग्राम पंचायत पानरवा, मावली के फलिचड़ा व साकरिया खेड़ी, गिर्वा के बारापाल, पाटिया व डोडावली, वल्लभनगर का भटेवर और कुराबड़ का वली शामिल है। इसी प्रकार, सलूंबर जिले में झल्लारा और बनोडा में इन अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा।

यह पहल केवल भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम ग्रामीण समृद्धि के रूप में देखने को मिलेंगे। डॉ. सुरेश कुमार जैन के अनुसार, इन केंद्रों के शुरू होने से पशु रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा, जिससे डेयरी और मांस उत्पादन में वृद्धि होगी। वर्तमान में इन क्षेत्रों में चिकित्सालय अस्थाई व्यवस्थाओं के तहत संचालित हो रहे हैं, जिससे पशुपालकों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नए और सुसज्जित भवनों के निर्माण से न केवल चिकित्सा का स्तर ऊँचा होगा, बल्कि छह चिन्हित संस्थाओं में चारदीवारी निर्माण से बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित होगा। यह परियोजना मेवाड़ के ग्रामीण अंचल में पशुपालन को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal Bureau

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