गाजियाबाद:

करीब 13 वर्षों से कोमा की स्थिति में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हरीश राणा के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सक्रिय हो गई है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरीश के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (परोक्ष इच्छामृत्यु) की अनुमति दिए जाने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन हरीश के परिवार की सुध लेने उनके घर पहुँचा।

तत्काल ₹2.50 लाख की सहायता और रोजगार का भरोसा

मुख्यमंत्री के आदेश पर गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार माँडड़, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में राणा परिवार के आवास पर पहुंचे।

अधिकारियों ने हरीश के पिता अशोक राणा और अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान प्रशासन की ओर से परिवार को तत्काल सहायता के रूप में 2.50 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसके साथ ही अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि परिवार को भविष्य में मुख्यमंत्री विवेकानंद सहायता कोष से अतिरिक्त आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। परिवार के भरण-पोषण के लिए प्रशासन ने एक दुकान आवंटित करने और परिवार के सदस्यों को सरकारी योजनाओं व रोजगार से जोड़ने की बात भी कही है।

13 साल का संघर्ष और आर्थिक तंगी

हरीश राणा का परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का रहने वाला है। हरीश के पिता अशोक राणा ने 1989 से 2021 तक दिल्ली के एक निजी होटल में नौकरी की। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही उनकी आय का मुख्य जरिया थी।

परिवार की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही है:

  • घर बेचना पड़ा: हरीश के महंगे इलाज और देखभाल के लिए परिवार को दिल्ली के द्वारका स्थित अपना तीन मंजिला मकान तक बेचना पड़ा था।
  • दैनिक खर्च: हरीश की दवाओं, मेडिकल ट्यूब और अन्य देखभाल पर हर महीने ₹25,000 से ₹30,000 का खर्च आ रहा था।
  • आय के अन्य स्रोत: परिवार अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए घर पर ही खाद्य सामग्री बनाकर बेचता है।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानवीय रुख

जिलाधिकारी ने परिवार को आश्वस्त किया कि इस कठिन समय में सरकार उनके साथ खड़ी है। अधिकारियों ने बताया कि हरीश की स्थिति को देखते हुए परिवार पिछले एक दशक से अधिक समय से मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुका था। अब प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि परिवार को सभी सरकारी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिले।

हरीश के पिता अशोक राणा ने सरकारी मदद मिलने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके बेटे को सम्मान के साथ विदा होने का रास्ता दिया है, वहीं मुख्यमंत्री की इस पहल से उनके परिवार को भविष्य के लिए एक सहारा मिला है।

कानून के साथ करुणा का मेल

हरीश राणा का मामला केवल कानूनी पेचीदगियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक परिवार के असीम धैर्य और सेवा की भी मिसाल है। जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने 'गरिमा के साथ मृत्यु' के अधिकार को मान्यता दी, वहीं राज्य सरकार ने 'संकट में परिवार की सहायता' के अपने कर्तव्य को निभाया है। 2026 का यह घटनाक्रम भारत के कानूनी और प्रशासनिक इतिहास में करुणा और न्याय के समन्वय के रूप में याद रखा जाएगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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