Parliament Special Session में महिला आरक्षण और परिसीमन के चक्रव्यूह में उलझा सदन; सत्ता और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग
Parliament Special Session 2026: महिला आरक्षण और 850 सीटों के परिसीमन विधेयक पर सत्ता-विपक्ष में तीखी बहस। जानें राहुल गांधी और पीएम मोदी के बयानों का पूरा विश्लेषण।

नई दिल्ली स्थित संसद भवन में विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर चर्चा करते सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य
Parliament Special Session 2026 : भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे गहमागहमी भरे अध्यायों में से एक आज देश की राजधानी में लिखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण को वर्ष 2029 तक पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने और लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने के उद्देश्य से लाए गए तीन नए विधेयकों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक संग्राम छेड़ दिया है। संसद के इस विशेष सत्र में पेश किए गए 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक', 'परिसीमन विधेयक 2026' और 'केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक' को लेकर लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने 18 घंटे की मैराथन बहस का समय तय किया है, जिसकी अंतिम परिणति शुक्रवार, 17 अप्रैल को शाम चार बजे होने वाली ऐतिहासिक वोटिंग के रूप में होगी।
विधेयकों की संवैधानिक तकनीकी और इसके राजनीतिक निहितार्थों को लेकर सदन के भीतर और बाहर जुबानी तीर चल रहे हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सदन के पटल पर रखे गए इन प्रस्तावों पर विपक्षी दलों ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इसे 'विचित्र' करार देते हुए सवाल उठाया कि जब सितंबर 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पहले से अस्तित्व में है, तो संशोधनों के बीच इस तरह की हड़बड़ी क्यों दिखाई जा रही है। वहीं, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में सरकार परिसीमन का खेल खेल रही है। राहुल गांधी का तर्क है कि जाति-आधारित जनगणना के बीच 2011 के पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल कर चुनावी क्षेत्रों में मनमाना फेरबदल करने की कोशिश की जा रही है, जिसका असली उद्देश्य सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना है।
क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण भी इस बहस में उभरकर सामने आए हैं। डीएमके सांसद कनिमोझी ने दक्षिण भारतीय राज्यों और पश्चिम बंगाल की आवाज दबने की आशंका जताई है। उनका दावा है कि उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की बढ़ोत्तरी से दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा और भाजपा महिलाओं को एक 'राजनैतिक ढाल' की तरह इस्तेमाल कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा नेता रेखा शर्मा ने विपक्ष के इन आरोपों को केवल एक बहाना बताया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये विधेयक हर हाल में पारित होंगे और 2029 तक लोकसभा में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी का सपना सच होगा। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनाव से पहले जनता को गुमराह करने वाली चाल बताया है।
संसदीय कार्यवाही के इस शोर-शराबे के बीच एक सुखद और गरिमामयी क्षण तब आया जब वरिष्ठ सांसद हरिवंश को निर्विरोध तीसरी बार राज्यसभा का उपसभापति चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए उनके अनुभव और सबको साथ लेकर चलने की कार्यशैली की सराहना की। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी उन्हें बधाई दी, जो सदन की स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाता है। हालांकि, महिला आरक्षण के मुद्दे पर गतिरोध बरकरार है। कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि वर्तमान 543 सीटों के आधार पर ही 2029 से आरक्षण लागू किया जाए, न कि परिसीमन के माध्यम से सीटों की संख्या बढ़ाकर। अब सबकी नजरें 17 अप्रैल की शाम को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि महिला आरक्षण का भविष्य और भारतीय लोकतंत्र का नया ढांचा किस दिशा में मुड़ेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
