Special Parliament Session : भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में 16 अप्रैल 2026 का दिन एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होने जा रहा है। संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए तीन अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा के पटल पर रखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे समय की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए स्पष्ट किया कि विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए नारी शक्ति का राष्ट्र निर्माण में पूर्ण सहभागिता अनिवार्य है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को धरातल पर उतारना है, जिसे लेकर सदन के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी वैचारिक जंग छिड़ गई है।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए इन विधेयकों के मसौदे में भारतीय राजनीति का भूगोल बदलने वाला प्रस्ताव शामिल है। सरकार ने 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक' के माध्यम से लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान किया है, जिसमें से 272 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही 'परिसीमन विधेयक 2026' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक' के जरिए चुनावी क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक कदम से लोकतंत्र अधिक जीवंत बनेगा, वहीं सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2029 तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की गरिमामय मौजूदगी सुनिश्चित करना ही इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य है।

हालांकि, इन विधेयकों के तकनीकी पहलुओं और परिसीमन की शर्तों ने विपक्ष को लामबंद कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी और डीएमके समेत 'इंडिया' गठबंधन के दलों ने इसे सरकार की 'बदनीयती' और 'सियासी खेल' करार दिया है। विपक्षी नेताओं का मुख्य विरोध परिसीमन के प्रावधानों को लेकर है, जिसका उपयोग चुनावी क्षेत्रों में फेरबदल के लिए किए जाने की आशंका जताई जा रही है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश है और सरकार को बिना परिसीमन की शर्त के वर्तमान सीटों पर ही आरक्षण लागू करना चाहिए। वहीं, समाजवादी पार्टी और ओवैसी ने ओबीसी तथा मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित न किए जाने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

सदन की कार्यवाही के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री ने विपक्ष के हर प्रहार का डटकर मुकाबला किया। शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता और जनगणना का कार्य शुरू हो चुका है जिसमें जातिगत जनगणना का निर्णय भी शामिल है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने परिसीमन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि यह देश के लिए एक गौरवशाली क्षण है और इसमें दक्षिण भारत के राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सदन में विधेयकों को स्वीकार करने के लिए हुई शुरुआती वोटिंग में सरकार के पक्ष में 251 और विरोध में 185 मत पड़े, जिससे यह साफ हो गया है कि बहुमत का पलड़ा भारी है।

अब सबकी नजरें कल यानी 17 अप्रैल को होने वाली निर्णायक वोटिंग पर टिकी हैं। सरकार ने चर्चा के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है, जिसके बाद इन विधेयकों को राज्यसभा भेजा जाएगा। यदि यह बिल पारित होते हैं, तो यह न केवल आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा, बल्कि भारतीय चुनाव प्रणाली के ढांचे में भी आमूल-चूल परिवर्तन लाएगा। सत्ता और विपक्ष के बीच जारी यह खींचतान इस बात का प्रमाण है कि 2026 का यह विशेष सत्र भारतीय राजनीति के आने वाले कई दशकों की दिशा और दशा तय करने वाला साबित होने जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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