क्या अब सुलझेगा भारत-चीन का सीमा विवाद? दिल्ली में बड़ी बैठक, जानिए क्या होगा फैसला
भारत और चीन के बीच 10 फरवरी 2026 को दिल्ली में अहम रणनीतिक वार्ता हुई। जानें सीमा शांति, कैलाश मानसरोवर यात्रा, वीजा नियमों में ढील और व्यापारिक मुद्दों पर क्या फैसला हुआ।

भारत और चीन के बीच संबंधों की जमी हुई बर्फ अब धीरे-धीरे पिघलती नजर आ रही है। हाल ही में नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय 'रणनीतिक वार्ता' ने न केवल सीमा पर शांति की उम्मीद जगाई है, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार भी खोले हैं।
मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओशू के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण 'रणनीतिक वार्ता' (Strategic Dialogue) हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत इस साल BRICS 2026 की अध्यक्षता कर रहा है।
दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में जिस सबसे बड़े शब्द पर जोर दिया गया, वह था—"स्थिरता"। दोनों देशों ने माना कि सीमा पर शांति ही वह बुनियाद है, जिस पर भविष्य के मजबूत रिश्तों की इमारत खड़ी की जा सकती है।
1. सीमा पर शांति: LAC पर अब आगे क्या?
2020 के गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर थे। अक्टूबर 2024 में हुए गश्त समझौते के बाद अब 2026 में बातचीत का स्तर और भी गहरा हुआ है। बैठक में यह साफ किया गया कि सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए पुराने संवाद तंत्रों को और मजबूत किया जाएगा। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक सीमा पर 'शांति और स्थिरता' (Peace and Tranquility) नहीं होगी, तब तक व्यापार और पर्यटन जैसे अन्य क्षेत्रों में पूरी प्रगति संभव नहीं है।
2. कैलाश मानसरोवर यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा
श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी यह है कि बैठक में कैलाश मानसरोवर यात्रा को और बड़े स्तर पर विस्तारित करने पर चर्चा हुई। 2025 में फिर से शुरू हुई इस यात्रा को 2026 में और अधिक सुलभ बनाने के लिए चीन ने सहयोग का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, दोनों देशों ने हवाई सेवा समझौते (Air Services Agreement) को जल्द अपडेट करने और सीधी उड़ानें शुरू करने पर भी सहमति जताई है।
3. वीजा नियमों में ढील और लोगों का जुड़ाव
एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दोनों पक्ष वीजा सुविधा (Visa Facilitation) को आसान बनाने पर सहमत हुए हैं। इससे न केवल व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि छात्रों और पर्यटकों के लिए भी एक-दूसरे के देश की यात्रा करना आसान हो जाएगा। भारत ने 'पीपल-टू-पीपल' (जन-जन के बीच) संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया ताकि दोनों संस्कृतियों के बीच की दूरियां कम हो सकें।
4. व्यापारिक घाटा और आर्थिक चुनौतियां
भारत और चीन के बीच व्यापार 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) अभी भी चिंता का विषय है। भारत ने चीनी बाजार में भारतीय फार्मास्युटिकल और आईटी उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच की मांग उठाई। दोनों पक्ष अब व्यापार से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को केवल आर्थिक नजरिए से नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दृष्टिकोण से सुलझाने पर सहमत हुए हैं।
चीन का बदला रुख: UNSC और BRICS पर साथ
इस वार्ता का सबसे चौंकाने वाला पहलू चीन का सकारात्मक रुख रहा। चीन ने न केवल भारत की BRICS अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन किया, बल्कि पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं के प्रति सम्मान और समझ भी दिखाई। चीन ने आधिकारिक बयान में कहा कि वह भारत को एक 'प्रतिद्वंद्वी' के बजाय एक 'सहयोगी साझेदार' (Cooperative Partner) के रूप में देखता है।
भरोसे की बहाली अभी भी एक चुनौती
हालांकि वार्ता के परिणाम बहुत सकारात्मक दिख रहे हैं, लेकिन कूटनीति के जानकारों का मानना है कि 'भरोसे की बहाली' रातों-रात नहीं हो सकती। सीमा पर सैनिकों की पूरी तरह से वापसी (De-escalation) अभी भी एक लंबी प्रक्रिया है। फिर भी, दिल्ली में हुई यह बातचीत इस बात का संकेत है कि एशिया के दो दिग्गज अब टकराव के बजाय संवाद के रास्ते पर चलना चाहते हैं।

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