क्या है ये 'Father of All Deals'? जिसने मचाया है हंगामा ; जाने इसकी खासियत
India - US के बीच हुआ 'Father of All Deals'! अमेरिकी टैरिफ में 32% की भारी कटौती ने भारतीय निर्यातकों के लिए $500 बिलियन का नया रास्ता खोला है। पीएम मोदी और ट्रंप की इस ऐतिहासिक डील से 'मेक इन इंडिया' को कैसे मिलेगी अजेय बढ़त और चीन पर इसका क्या होगा असर? पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी और नफा-नुकसान का पूरा विश्लेषण।

India-US Father of All Deals : वैश्विक व्यापार के रणक्षेत्र में भारत ने एक ऐसी कूटनीतिक जीत हासिल की है, जिसे उद्योग जगत 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' मान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद "फादर ऑफ ऑल डील्स" (Father of All Deals) की घोषणा की गई। इस समझौते ने पिछले कई महीनों से चले आ रहे व्यापारिक गतिरोध को समाप्त करते हुए भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर सीधे 18% पर ला खड़ा किया है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक बाजार में अजेय बढ़त दिलाने की दिशा में सबसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
समझौते के मुख्य स्तंभ: टैरिफ युद्ध का अंत
इस समझौते की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (मदर ऑफ ऑल डील्स) से भी बड़ा माना जा रहा है। समझौते के प्रमुख कानूनी और आर्थिक बिंदु इस प्रकार हैं:
- टैरिफ में क्रांतिकारी बदलाव: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले ५०% के दंडात्मक शुल्क को घटाकर १८% कर दिया है। इसमें वह २५% अतिरिक्त दंड भी शामिल था जो भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया था।
- ऊर्जा और तकनीक का आदान-प्रदान: भारत ने आगामी वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन मूल्य की ऊर्जा, तकनीक, कोयला और कृषि उत्पाद खरीदने का लक्ष्य रखा है।
- रूसी तेल पर रणनीतिक रुख: व्हाइट हाउस के अनुसार, भारत ने रूसी तेल की खरीद को धीरे-धीरे बंद करने और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका एवं वेनेजुएला की ओर रुख करने पर सहमति जताई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: नफा और नुकसान
नफा (Profits) :
- निर्यात में भारी उछाल: १८% टैरिफ के साथ भारतीय कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन अब अमेरिकी बाजार में चीन (३४%) और वियतनाम (२०%) के मुकाबले काफी सस्ते होंगे।
- क्षेत्रीय लाभ: टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, और ऑटो पार्ट्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में करोड़ों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
- बाजार में उत्साह: समझौते की घोषणा के बाद सेंसेक्स ३,६०० अंकों से ज्यादा उछला और रुपया भी डॉलर के मुकाबले ९०.४० के स्तर पर मजबूत हुआ।
नुकसान / चुनौतियां (Losses & Challenges) :
- महंगी ऊर्जा: रूस से मिलने वाले रियायती तेल को छोड़कर अमेरिकी ऊर्जा पर निर्भरता भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है।
- घरेलू प्रतिस्पर्धा: अमेरिका के डेयरी और कृषि उत्पादों के लिए 'जीरो टैरिफ' का वादा भारतीय किसानों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
