क्या है भारत का वो नया प्लान? जिससे चीन और पाकिस्तान के उड़ गए होश, जाने विस्तार से
रक्षा मंत्रालय ने ₹2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को दी मंजूरी! रूस से अतिरिक्त S-400, धनुष गन और स्ट्राइक ड्रोन से बढ़ेगी भारत की सैन्य ताकत। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

Defense Acquisition Council meeting : देश की सीमाओं की सुरक्षा को एक नए शिखर पर ले जाते हुए भारत सरकार ने सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय सेना और वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करीब ₹2.38 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इस महा-सौदे का सबसे अहम हिस्सा रूस से 'S-400 ट्रायम्फ' एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त बैटरी की खरीद है, जो चीन और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमाओं पर भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बना देगा।
वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे आधुनिक विमान और घातक ड्रोन :
भारतीय वायुसेना की सामरिक और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए DAC ने केवल मिसाइल सिस्टम ही नहीं, बल्कि परिवहन और टोही विमानों के लिए भी बड़े फैसले लिए हैं। पुराने पड़ चुके AN-32 और IL-76 मालवाहक विमानों के बेड़े को बदलने के लिए 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' (MTA) की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए 'रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट' को भी शामिल किया जाएगा। ये आधुनिक ड्रोन न केवल आक्रामक जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम होंगे, बल्कि स्टील्थ इंटेलिजेंस, निगरानी और टोही (ISR) गतिविधियों में वायुसेना की 'आँख और कान' बनकर उभरेंगे। साथ ही, Su-30 फाइटर जेट्स के एयरो इंजन ओवरहाउल के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है, जिससे इन लड़ाकू विमानों की उम्र और दक्षता बढ़ेगी।
थल सेना के लिए धनुष गन और अत्याधुनिक संचार प्रणालियाँ :
बैठक में भारतीय थल सेना की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी गई है। सेना की आर्टिलरी (तोपखाना) शक्ति को नया विस्तार देने के लिए स्वदेशी 'धनुष गन सिस्टम' की अतिरिक्त खरीद को स्वीकृति मिली है, जिससे लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधना संभव होगा। इसके अलावा, युद्ध के मैदान में निर्बाध और सुरक्षित संचार सुनिश्चित करने के लिए 'हाई कैपेसिटी रेडियो रिले' और रीयल-टाइम एयर डिफेंस कंट्रोल के लिए 'एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम' को मंजूरी दी गई है। दुर्गम इलाकों में निगरानी के लिए 'रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम' और टैंकों के लिए घातक 'आर्मर-पियर्सिंग एम्युनिशन' भी सेना के तरकश में शामिल होंगे।
रक्षा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक महत्व :
इन प्रस्तावों को दी गई मंजूरी केवल हथियारों की खरीद भर नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भारत के कड़े रुख को प्रदर्शित करती है। ₹2.38 लाख करोड़ का यह निवेश 'आत्मनिर्भर भारत' और सेनाओं की 'रेडीनेस' (तत्परता) के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेनाएं सभी प्रकार के भौगोलिक क्षेत्रों—चाहे वो लद्दाख की पहाड़ियां हों या राजस्थान का रेगिस्तान—में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होंगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
