What is Quad alliance : वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक बिसात पर इस समय एक ऐसा चक्रव्यूह आकार ले चुका है, जिसने महाशक्तियों के बीच नए शीत युद्ध की सुगबुगाहट तेज कर दी है। हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने और मुक्त समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने के लिए गठित 'चतुर्भुज सुरक्षा संवाद' यानी क्वाड (QUAD) वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन गया है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे दुनिया के चार बड़े लोकतांत्रिक देशों का यह अनौपचारिक मंच आज एक ऐसी महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है, जो सीधे तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक वर्चस्व को चुनौती दे रहा है। हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर कोई सैन्य गठबंधन नहीं माना जाता, लेकिन इसके अंतर्गत लिए जा रहे रणनीतिक फैसलों, संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सदस्य देशों की बढ़ती एकजुटता ने बीजिंग को औपचारिक राजनयिक विरोध जारी करने और इसे "एशियाई नाटो" पुकारने पर मजबूर कर दिया है।


इस शक्तिशाली मंच की पृष्ठभूमि साल 2004 में आई विनाशकारी सुनामी के बाद उपजे मानवीय सहयोग से तैयार हुई थी, लेकिन इसे औपचारिक रूप से साल 2007 में जापान के तत्कालीन दूरदर्शी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के प्रयासों से शुरू किया गया। शुरुआत में इसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मजबूत समर्थन मिला। इसी दौरान आयोजित हुए 'अभ्यास मालाबार' नामक अभूतपूर्व पैमाने के संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ने इस गठबंधन की छिपी ताकत को दुनिया के सामने जाहिर कर दिया था, जिसे व्यापक रूप से चीनी आर्थिक और सैन्य शक्ति के उभार की प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया। हालांकि, चीन के कड़े राजनयिक विरोध और बीजिंग को खुश रखने की कूटनीति के कारण फरवरी 2008 में ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री केविन रुड ने अचानक इस मंच से अपने कदम पीछे खींच लिए। इसके साथ ही जापान में आबे की जगह अधिक बीजिंग-अनुकूल प्रधानमंत्री यासुओ फुकुदा का आना और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जनवरी 2008 की चीन यात्रा, जिसमें उन्होंने भारत-चीन संबंधों को प्राथमिकता दी, इस उभरते मंच के अस्थायी रूप से निष्क्रिय होने का कारण बनी।


इस उतार-चढ़ाव के बीच कूटनीतिक समीकरण बदलते रहे और रुड के बाद आई जूलिया गिलार्ड सरकार के दौरान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग को फिर से बढ़ाया गया, जिसके तहत डार्विन के पास अमेरिकी मरीन की नियुक्ति हुई जो तिमोर सागर और लोम्बोक जलडमरूमध्य पर नजर रखती थी। इस मध्यांतर के दौरान भी भारत, जापान और अमेरिका ने मालाबार अभ्यास को जारी रखा। साल 2012 में शी जिनपिंग के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बनने के बाद चीन की विदेश नीति बेहद आक्रामक हो गई और उसने 'सलामी स्लाइसिंग' नीति के तहत दक्षिण चीन सागर में स्प्रैटली और पैरासेल द्वीपों पर अभूतपूर्व पैमाने पर कृत्रिम द्वीप निर्माण और उनका सैन्यीकरण शुरू कर दिया। जुलाई 2016 में समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के तहत गठित एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने फिलीपींस बनाम चीन मामले में चीन के इन समुद्री दावों के खिलाफ फैसला सुनाया, जिसे चीन ने मानने से इनकार कर दिया। इस बढ़ते तनाव और साल 2017 के डोकलाम सीमा गतिरोध ने अंततः भारत सहित सभी देशों की सोच बदल दी। नतीजतन, नवंबर 2017 में मनीला के आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने इस चतुर्भुज गठबंधन को पुनर्जीवित करने पर ऐतिहासिक सहमति व्यक्त की।


वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में क्वाड केवल एक सुरक्षा संवाद न रहकर बहुआयामी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का जरिया बन चुका है, जिसने मार्च 2021 के ऐतिहासिक "द स्पिरिट ऑफ द क्वाड" संयुक्त बयान के जरिए स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि को मजबूत किया है। इस मंच के तहत अब मैर्केटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) के जरिए अवैध शिकार और संदिग्ध जहाजों पर उपग्रह से नजर रखी जा रही है, तो वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 'क्वाड कैंसर मूनशॉट' जैसी मानवीय पहल चलाई जा रही हैं। इसके अलावा, 5G, 6G तकनीक, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए चारों देश मिलकर नए मानक तय कर रहे हैं। हालिया वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों और जलमार्गों के अवरुद्ध होने के दौर में क्वाड देशों की नौसेनाओं का आपसी तालमेल और सुरक्षा ढांचा दुनिया के व्यापार के लिए एक मजबूत जीवनरेखा साबित हो रहा है, जिसने भारत को हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक नेट-सिक्योरिटी प्रदाता के रूप में स्थापित कर कूटनीतिक रूप से महाशक्तियों की कतार में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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