कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवगठित सुवेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य की प्रशासनिक और शैक्षिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी प्रभाव वाला नीतिगत बदलाव किया है। राज्य सरकार की कैबिनेट ने एक बड़ा आधिकारिक आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल के सभी मान्यता प्राप्त और सहायता प्राप्त मदरसों में सुबह की दैनिक प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य कर दिया है। राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आधिकारिक फैसले के बाद से प्रदेश की सियासत में वैचारिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार का यह निर्देश तात्कालिक प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिसका उल्लंघन करने वाले शिक्षण संस्थानों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की बात भी कही जा रही है।

इस बड़े नीतिगत फैसले की प्रशासनिक धरातल पर पुष्टि करते हुए पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने बताया कि यह निर्णय राज्य की धर्मनिरपेक्ष शैक्षिक प्रणाली में एकरूपता लाने के उद्देश्य से लिया गया है। मंत्री खुदीराम टुडू ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कई ऐसे सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां मुख्य रूप से जनजातीय संताली भाषा में शैक्षणिक गतिविधियां संपन्न होती हैं। जब उन विशिष्ट संताली माध्यम के विद्यालयों में भी 'वंदे मातरम' का गायन पूरी तरह अनिवार्य है, तो राज्य के अन्य मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे लागू करने में कोई प्रशासनिक या संवैधानिक अड़चन नहीं होनी चाहिए। इसी तार्किकता के आधार पर मदरसा शिक्षा निदेशालय ने विस्तृत नियमावली तैयार की है।

मदरसा शिक्षा निदेशक द्वारा जारी किए गए इस आधिकारिक शासनादेश के तकनीकी पहलुओं को देखें, तो इसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि पूर्व काल से चली आ रही इस संदर्भ की सभी पुरानी प्रथाओं, परंपराओं और पूर्ववर्ती आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Supersede) किया जाता है। नए नियम के दायरे में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे (अंग्रेजी माध्यम), सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एवं वित्तीय सहायता प्राप्त मदरसे, राज्य द्वारा स्वीकृत मदरसा शिक्षा केंद्र (MSK), शिशु शिक्षा केंद्र (SSK) और सरकार से मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसे भी शामिल होंगे। इन सभी संस्थानों में मुख्य कक्षाएं शुरू होने से ठीक पहले आयोजित होने वाली सुबह की सामान्य प्रार्थना सभा में 'वंदे मातरम' का गायन अब पूर्णतः अनिवार्य होगा।

इस निर्णय की पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो मदरसा शिक्षा निदेशालय के इस आदेश से ठीक पहले राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एक व्यापक अधिसूचना जारी की थी। उस अधिसूचना के माध्यम से पश्चिम बंगाल के अंतर्गत आने वाले सभी सामान्य सरकारी और सहायता प्राप्त प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में भी प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किया गया था। राज्य के नवनियुक्त और नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस अधिसूचना को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए इसे राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया था। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा हस्ताक्षरित उस मूल अधिसूचना में भी इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के सख्त प्रशासनिक निर्देश दिए गए थे।

विधिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से इस प्रकार के प्रशासनिक आदेशों का क्रियान्वयन हमेशा से ही भारतीय न्यायपालिका और नागरिक समाज के बीच गहन विमर्श का विषय रहा है। राज्य सरकार के कानूनी सलाहकारों का मानना है कि राष्ट्रगीत का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है और इसे किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान में लागू करना वैधानिक रूप से वैध है। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर राज्य के विभिन्न अल्पसंख्यक संगठनों और विपक्षी दलों के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, जो आने वाले दिनों में एक बड़े राजनीतिक गतिरोध का रूप ले सकता है। फिलहाल, यह निर्णय पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में सुवेंदु अधिकारी सरकार की मजबूत और स्पष्ट नीतिगत प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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