सत्ता बदलते ही बदल गए नियम! पश्चिम बंगाल में ईद के विशेष अवकाश में कटौती, गरमाई सूबे की सियासत
पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार द्वारा दी जाने वाली दो दिनों की छुट्टी को वर्तमान भाजपा सरकार ने घटाकर किया एक दिन, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का दिया हवाला

पश्चिम बंगाल में नई सरकार द्वारा ईद की छुट्टियों में कटौती की अधिसूचना जारी होने के बीच नमाज अदा करते नागरिक।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों का सिलसिला शुरू हो चुका है। राज्य की नवनिर्वाचित शुभेंदु सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल से चली आ रही सरकारी छुट्टियों की व्यवस्था में एक बड़ा नीतिगत संशोधन किया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस वर्ष सरकारी कर्मचारियों को ईद (बकरीद) के अवसर पर मिलने वाले दो दिनों के अवकाश को घटाकर केवल एक दिन कर दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से राज्य में ईद के अवसर पर दो दिनों की लगातार छुट्टी देने की प्रथा शुरू की गई थी, जिसे वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरी तरह बदल दिया है। इस प्रशासनिक निर्णय के सामने आने के बाद से ही राज्य के राजनीतिक गलियारों और सरकारी कर्मचारी संगठनों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।
पश्चिम बंगाल के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी संशोधित अवकाश तालिका के अनुसार, पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कैलेंडर में ईद की छुट्टियां दो दिन निर्धारित की गई थीं। पूर्व में घोषित इस कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए नई सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष राज्य में केवल एक ही दिन का सार्वजनिक अवकाश मान्य होगा। इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी किए गए राष्ट्रीय अवकाश संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता और उत्पादकता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जाना आवश्यक था। इस नई नीति के तहत राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और वैधानिक निकायों में पूर्व निर्धारित दो दिवसीय बंद की जगह अब केवल एकल दिवस की बंदी लागू की जा रही है।
इस नीतिगत बदलाव के समानांतर, राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भी व्यापक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए हैं। गृह विभाग के माध्यम से राज्य के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और स्थानीय पुलिस स्टेशनों को एक विशेष सतर्कता निर्देश जारी किया गया है। इस निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि अवकाश की अवधि में संशोधन के प्रशासनिक निर्णय का प्रभाव त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन पर नहीं पड़ना चाहिए। त्योहार को बिना किसी व्यवधान और सुरक्षा चूक के संपन्न कराने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और सघन गश्त के आदेश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि इस प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव के बीच सांप्रदायिक सौहार्द और कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रहे।
इसके अतिरिक्त, शुभेंदु सरकार ने राज्य के शैक्षणिक कैलेंडर और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से हाल ही में ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) से संबंधित नियमों में भी महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। अत्यधिक गर्मी और लू की स्थितियों को देखते हुए स्कूलों और सरकारी कार्यालयों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि को बढ़ा दिया गया है। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान विभिन्न त्योहारों और सांस्कृतिक अवसरों पर दी जाने वाली अतिरिक्त छुट्टियों के कारण कार्य दिवसों (वर्किंग डेज) की संख्या में भारी कमी आ गई थी, जिससे न केवल सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा था बल्कि विकास परियोजनाओं की गति भी धीमी पड़ रही थी। यही कारण है कि नई सरकार अब छुट्टियों की पूरी सूची की समीक्षा कर रही है ताकि प्रशासनिक दक्षता और जनहित के कार्यों में संतुलन स्थापित किया जा सके।
प्रशासनिक स्तर पर इस फैसले को एक बड़े नीतिगत सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बता रहे हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही सरकार पूर्ववर्ती शासन के कई प्रतीकात्मक फैसलों को बदलने की दिशा में सक्रिय है। छुट्टियों के इस नए वर्गीकरण और कटौती के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान जोड़ी गई अन्य विशेष और अतिरिक्त क्षेत्रीय छुट्टियों की सूची में भी इसी तरह की कटौती देखने को मिलेगी। बहरहाल, सरकार के इस आधिकारिक कदम ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि राज्य में अब प्रशासनिक कामकाज के दिनों और नियमों को केंद्रीय मापदंडों के अधिक निकट लाने का प्रयास किया जाएगा, जिसके दूरगामी राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
