नाटो में दरार: ईरान के खिलाफ सहयोगियों ने खींचे हाथ, भड़के राष्ट्रपति ट्रंप बोले—"हमें किसी के समर्थन की जरूरत नहीं"

वॉशिंगटन:

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और उसके सबसे पुराने सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) के बीच एक बड़ी खाई नजर आने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकांश नाटो सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने इसे 'एकतरफा व्यवस्था' करार देते हुए सहयोगियों को खरी-खोटी सुनाई है।

ट्रंप की नाराजगी: "हम रक्षा करते हैं, वे कुछ नहीं करते"

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान के 'आतंकी शासन' के खिलाफ किसी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "मुझे नाटो देशों के इस रुख से कोई हैरानी नहीं हुई है। मैं हमेशा से मानता रहा हूँ कि नाटो एक ऐसी व्यवस्था बन गई है जहाँ अमेरिका सबकी रक्षा करता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो वे कुछ नहीं करते।"

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाटो के लगभग सभी सदस्य इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाना चाहिए।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम का खुलासा: ट्रंप का गुस्सा चरम पर

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राष्ट्रपति के गुस्से की गहराई की पुष्टि की। ग्राहम ने लिखा, "मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से बात की। वह यूरोपीय सहयोगियों की उस अनिच्छा पर बेहद गुस्से में थे, जिसमें उन्होंने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को खुला रखने के लिए संसाधन देने से मना कर दिया है।"

ग्राहम ने आगे कहा कि इस समुद्री रास्ते का सबसे ज्यादा फायदा यूरोप को होता है, फिर भी वे मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने जीवन में ट्रंप को इतना गुस्से में कभी नहीं सुना।

"हमने ईरान का प्रतिरोध खत्म कर दिया"

सहयोगियों के इनकार पर पलटवार करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना पहले ही ईरान की कमर तोड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी लगभग समाप्त हो चुका है।

ट्रंप ने गर्व से कहा, "इन सैन्य सफलताओं के बाद अब हमें किसी की सहायता की न तो चाहत है और न ही जरूरत। हमें इसकी कभी जरूरत थी भी नहीं।"

एशियाई साझेदारों और ब्रिटेन पर भी निशाना

ट्रंप का यह कड़ा रुख केवल नाटो तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई साझेदारों का जिक्र करते हुए भी यही दोहराया कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है। ब्रिटेन के संदर्भ में उन्होंने बताया कि अमेरिका ने कुछ युद्धपोत और माइनस्वीपर भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन ब्रिटेन का जवाब उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

आगे क्या?

राष्ट्रपति ट्रंप के इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। एक ओर जहाँ अमेरिका अकेले दम पर ईरान को चुनौती देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नाटो सहयोगियों के साथ बढ़ती यह तल्खी वैश्विक सुरक्षा ढांचे के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रही है। ओवल ऑफिस में अपनी नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में अमेरिका अपनी रक्षा नीतियों और गठबंधन की शर्तों में बड़े बदलाव कर सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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