क्या दिल्ली एयरपोर्ट पर होने वाला था दुनिया का सबसे बड़ा विमान हादसा? गलत रनवे पर लैंडिंग की जांच में रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे
दिल्ली एयरपोर्ट पर एयरियाना अफगान विमान FG 311 की गलत रनवे पर लैंडिंग की जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। कैसे एयर इंडिया के विमान से होने वाली थी भीषण टक्कर और क्यों फेल हुआ विमान का लैंडिंग सिस्टम? विस्तार से पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नई दिल्ली: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) के रनवे पर एक ऐसी खौफनाक तस्वीर उभर सकती थी, जो भारतीय विमानन इतिहास का काला अध्याय बन जाती। पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई एक 'मिरेकल एस्केप' यानी चमत्कारिक बचाव की जांच रिपोर्ट अब सामने आई है, जिसने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और विमानों की सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एयरियाना अफगान एयरलाइंस (Ariana Afghan Airlines) की उड़ान संख्या FG 311 से जुड़ा है, जो काबुल से दिल्ली आ रही थी। 23 नवंबर 2025 की दोपहर जब यह विमान दिल्ली के आसमान में मंडरा रहा था, तब एक छोटी सी तकनीकी चूक और खराब विजिबिलिटी ने इसे मौत के रनवे की ओर धकेल दिया था।
घटना की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि काबुल से आए इस एयरबस A310 विमान को एटीसी ने रनवे 29L (जो लैंडिंग के लिए आरक्षित है) पर उतरने की अनुमति दी थी। लेकिन, विमान ने अचानक अपना रास्ता बदला और बगल के रनवे 29R पर उतर गया, जिसका उपयोग केवल विमानों के उड़ान भरने (टेक-ऑफ) के लिए किया जाता है। सनसनीखेज बात यह है कि इसी रनवे 29R से चंद लम्हों पहले एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI-2243 ने रियाद के लिए उड़ान भरी थी। यदि अफगान विमान कुछ सेकंड पहले लैंड कर जाता, तो रनवे पर दो विशालकाय विमानों की भीषण टक्कर निश्चित थी।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की जांच में विमान के पायलट-इन-कमांड (PIC) ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब विमान लैंडिंग से महज 4 नॉटिकल मील की दूरी पर था, तब अचानक उसका इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) फेल हो गया। पायलट ने अधिकारियों को बताया कि 'फाइनल अप्रोच फिक्स' के दौरान सिस्टम में खराबी आने और लो विजिबिलिटी (कम दृश्यता) के कारण विमान अनजाने में दाईं ओर मुड़ गया। पायलट का यह भी आरोप है कि जब उनका विमान भटक रहा था, तब दिल्ली टावर (ATC) ने उन्हें कोई चेतावनी नहीं दी। लैंडिंग के बाद ही पायलट को एहसास हुआ कि वह गलत रनवे पर आ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने विमानन सुरक्षा के कानूनी और तकनीकी ढांचे को हिलाकर रख दिया है। महानिदेशक कार्यालय अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि क्या यह केवल पायलट की गलती थी या फिर दिल्ली एटीसी के उपकरणों में कोई 'सॉफ्टवेयर ग्लिच' था, जिसकी चेतावनी कंट्रोलर्स ने महीनों पहले दी थी। अमित भारद्वाज और अन्य विशेषज्ञों की निगरानी में चल रही यह जांच अब अंतिम चरण में है। डीजीसीए ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अफगान विमानन अधिकारियों को भी पत्र लिखने का निर्णय लिया है। यह हादसा भले ही टल गया हो, लेकिन इसने करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा के प्रति एक बड़ी चेतावनी जारी कर दी है।

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