विजयादशमी मानना चाहते हैं ? जानिए मुहूर्त...
दशहरा हर वर्ष नवरात्री के बाद मनाया जाता है। इस दिन भारत के कई राज्यों में रावण के पुतले को जलाते हैं, और कुछ राज्यों में दुर्गा माता की मूर्ति का विसर्जन होता है।

हिन्दू धर्म में हर एक त्योहार में कई प्रकार के विधि-विधान होते हैं जो उन्हें खास बनाते हैं। और वर्षों से सारे त्यौहारों को बड़े धूम-धाम से पुरे भारत में मनाया जाता है। और ऐसे ही खास त्योहारों में से एक है 'विजयादशमी' जिसे 'दशहरा' भी कहा जाता है। ये पर्व नवरात्री के 9 दिनों बाद होता है इसलिए इसे दशमी भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब द्वापरयुग में माँ दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया, त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया, और त्रेता युग के अंत में अर्जुन ने विराट युद्ध में 10,000 कौरव सैनिकों को सम्मोहन अस्त्र से हराया, तब इन सभी ऐतिहासिक क्षणों के दिन विजयादशमी थी। और इन सभी युद्धों के पीछे केवल एक मान्यता थी, बुराई पर अच्छाई की जीत।
हर वर्ष दशहरे के पावन पर्व पर रावण दहन किया जाता है। 10 दिन पहले से भारत के कई हिस्सों में, मुख्या रूप से उत्तरी भारत में रामलीला नाटक शुरू हो जाता है। जो दसवे दिन रावण दहन से समाप्त किया जाता है। पूर्वी भारत खास करके पश्चिम बंगाल में दुर्गा माता की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है, तो दक्षिण भारत में अपने औज़ारों, पुस्तकों और काम आने वाले उपयोगी सामानों की पूजा करते हैं।
इस साल दशहरा 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएग। आईए जानते हैं पूजा का शुभ समय और विधि :-
दशमी तिथि: 1 अक्टूबर को शाम 7:01 से 2 अक्टूबर शाम 7:10 बजे तक।इस दिन मुख्य रूप से विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। ये अश्विन शुक्ल पक्ष के दिन आता है और रावण का दहन भी इसी दिन किया जाता है। और ये दुर्गा पूजा / नवरात्री का अंतिम दिन होता है।
विजय मुहूर्त: 2 अक्टूबर को दोपहर 2:09 से दोपहर 2:56 बजे तक रहेगा।
ये मुहूर्त किसी भी महत्वपूर्ण कार्य में विजय दिलाता है।
अपराह्न पूजा: 2 अक्टूबर को दोपहर 1:21 से दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा।
ये शस्त्रों के पूजन का समय है।
रावण दहन: शाम 6 :03 के बाद।
सुबह की पूजा:
- सबसे पहले, सुबह उठ कर शुद्ध रूप से स्नान कर लें।
- आम के पत्ते और गेंदे फूल से तोरण को घर के मुख्य द्वार पर लगाए।
- सुबह की पूजा कर, भोग लगाके कुछ समय बाद परिवार में बाँट दें।
शाम की पूजा:
- बत्ती लगा कर शाम की पूजा संपन्न करें।
- श्री राम रक्षा स्तोत्रम और श्री सूक्तम का पथ कर लें।
- अपराह्न पूजा- अस्त्रों-शस्त्रों की पूजा कर लें।
- उसके बाद सरस्वती पूजन कर लें।
रावण दहन केवल एक पुतले को जलाना नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे परंपरा की निशानी है। ये परंपरा दर्शाती है के कैसे दुनिया में अनेकों बुराईयां, कठिनाईयां, और कपट होने के बावजूद, एक दृढ निश्चय और सत्यता बदलाव ला सकती है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
