Iran-US War में क्या भारत बनेगा 'शांति का दूत'? सर्जियो गोर के बयान से वैश्विक हलचल
Iran-US War के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा बयान। क्या भारत बनेगा विश्व शांति का मसीहा? जानिए पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत के अनकहे पहलू।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (दाएं) और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (बाएं)
Sergio Gor statement on India-US relations : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते बारूद के ढेर और ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। इस्लामाबाद में पाकिस्तान और मिस्र की मध्यस्थता से हुई पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद, अब सबकी निगाहें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र—भारत—पर टिक गई हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी है। गोर ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ जारी इस भीषण संघर्ष को रोकने में अमेरिका, भारत की भूमिका का न केवल स्वागत करेगा, बल्कि इसे एक निर्णायक कदम के रूप में देख रहा है।
सर्जियो गोर ने एक विशेष साक्षात्कार में साझा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप शांति की स्थापना के लिए किसी भी देश के साथ सहयोग करने को तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मिडिल ईस्ट में स्थिरता लाने के लिए अमेरिका किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं कर रहा है; जो भी देश इस मानवीय और आर्थिक संकट को समाप्त करने में सक्षम है, उसका स्वागत है। गोर के अनुसार, "यह अंततः भारत को तय करना है कि वह इस शांति प्रक्रिया में कितनी गहराई से उतरना चाहता है, लेकिन पूरी दुनिया को विश्वास है कि भारत के पास वह सामर्थ्य है जो इस युद्ध की दिशा बदल सकता है।"
इस कूटनीतिक घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया 40 मिनट की टेलीफोनिक बातचीत है। इस संवाद के दौरान न केवल युद्ध के समाधान पर चर्चा हुई, बल्कि भविष्य की रूपरेखा भी तैयार की गई। राजदूत गोर ने संकेत दिए कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत के दौरे पर आ सकते हैं, जो आगामी कूटनीतिक सक्रियता का बड़ा प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, वाशिंगटन से लौटने के बाद गोर ने यह भी इशारा किया कि आने वाले कुछ ही दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कुछ बड़ी और ऐतिहासिक घोषणाएं हो सकती हैं।
युद्ध के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए सर्जियो गोर ने ईरान पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में जो उछाल देखा जा रहा है, उसका मुख्य कारण ईरान द्वारा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों को बंधक बनाना है। अमेरिका का मानना है कि इन जलमार्गों पर ईरान की नाकेबंदी न केवल व्यापार को बाधित कर रही है, बल्कि दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर रही है। गोर ने तर्क दिया कि यदि भारत के सहयोग से यह जलमार्ग फिर से सुचारू रूप से खुलता है, तो इसका लाभ सीधे तौर पर भारत सहित पूरी मानवता को मिलेगा।
लेख के अंत में यह स्पष्ट होता है कि इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद अब वैश्विक बिरादरी एक ऐसे मध्यस्थ की तलाश में है जिसकी साख दोनों पक्षों में हो। सर्जियो गोर के शब्दों में, "किसी एक देश को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह दुनिया के किसी भी हिस्से की बत्तियां बुझा दे।" अमेरिका इस अन्याय को रोकने के लिए संकल्पित है और इस मिशन में वह भारत को एक मजबूत भागीदार के रूप में देख रहा है। अब गेंद भारत के पाले में है कि वह इस वैश्विक संकट में 'विश्वबंधु' की अपनी छवि को किस प्रकार धरातल पर उतारता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
