अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में बढ़ा गतिरोध: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रखीं पांच सख्त शर्तें|
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की पांच शर्तों के बाद तेहरान के साथ शांति वार्ता में गतिरोध बढ़ा।

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संयुक्त कोलाज तस्वीर|
पश्चिम एशिया में जारी गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संकट के बीच वैश्विक शांति के प्रयासों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध को स्थाई रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू हुई वार्ता गहरे गतिरोध में फंस गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के समक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पांच अत्यंत कठोर शर्तें रखी हैं, जिन्हें ईरानी मीडिया और रणनीतिक विश्लेषकों ने एकतरफा करार दिया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चली प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के बाद स्थापित हुआ अस्थायी युद्धविराम अब खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि अमेरिका ने ईरान को कोई भी ठोस रियायत देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
इस कूटनीतिक तनातनी की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह संकट तब और गहरा गया जब अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित करने और उसके समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम के भंडार को देश से बाहर भेजने की अनिवार्य शर्त रख दी। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मांग की है कि तेहरान को वार्ता की मेज पर बने रहने के लिए चार सौ किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम तुरंत वाशिंगटन को सौंपना होगा। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ईरान के भीतर केवल एक ही परमाणु सुविधा केंद्र चालू रखने की अनुमति दी जाएगी, जबकि उसकी अन्य सभी न्यूक्लियर फैसिलिटीज को स्थाई रूप से बंद करना होगा।
ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका वित्तीय और नीतिगत मोर्चे पर लगा है, जहां ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से हुए आर्थिक नुकसान के लिए तेहरान को किसी भी प्रकार का मुआवजा देने से मना कर दिया है। यह मुआवजा ईरान की ओर से किसी भी स्थाई शांति समझौते के लिए एक बुनियादी और मुख्य मांग रही है। इसके साथ ही, वाशिंगटन ने विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्ति का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा भी जारी करने के ईरानी अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी मीडिया आउटलेट्स का दावा है कि अमेरिका का यह अड़ियल रुख वार्ता की मेज पर उन फायदों को हासिल करने की एक सोची-समझी कोशिश है, जिन्हें वह रणक्षेत्र में सीधे सैन्य बल के माध्यम से प्राप्त करने में पूरी तरह नाकाम रहा था।
दूसरी ओर, ईरान ने इस पूरे मामले में एक अत्यंत सख्त और समझौता न करने वाला रुख अख्तियार कर लिया है। तेहरान की मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर अपनी पूर्ण संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की बात दोहराई है और परमाणु कार्यक्रम के संवेदनशील मुद्दे को फिलहाल शांति वार्ता से अलग रखने की वकालत की है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के करीबी सूत्रों का कहना है कि देश की संप्रभुता और आर्थिक अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुए इस तनाव को कम करने में पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता भी अब निष्प्रभावी साबित होती दिख रही है क्योंकि इस्लामाबाद में हुई बातचीत किसी अंतिम तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने में विफल रही।
वैश्विक कूटनीति के जानकारों का मानना है कि यदि दोनों महाशक्तियों के बीच यह गतिरोध शीघ्र ही दूर नहीं किया गया, तो अस्थायी सीजफायर की अवधि समाप्त होते ही पूरा पश्चिम एशिया दोबारा एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस सकता है। वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के सख्त दावों और अमेरिका की परमाणु पाबंदियों की जिद ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कूटनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है कि शांति की बहाली के लिए बाजार और सैन्य हितों से ऊपर उठकर कोई बीच का रास्ता निकालना अब बेहद पेचीदा हो चुका है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
