US-Iran Talks 2.0 Islamabad fails : वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बार फिर तनाव की लकीरें गहरी हो गई हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति बहाली और परमाणु गतिरोध सुलझाने के लिए शुरू हुए 'दूसरे दौर की वार्ता' (Talks 2.0) के प्रयास औंधे मुंह गिर गए हैं। ईरान ने न केवल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से साफ इनकार कर दिया है, बल्कि वॉशिंगटन को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश भी भेजा है कि वह किसी भी प्रकार की 'अनुचित और अधिकतमवादी' (Maximalist) मांगों के आगे घुटने नहीं टेकेगा। इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में युद्ध समाप्ति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका दिया है।

इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान के सख्त रुख की पुष्टि करते हुए अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वे सैद्धांतिक रूप से अमेरिका की उन मांगों को स्वीकार नहीं करेंगे जो ईरान की संप्रभुता और हितों के विरुद्ध हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जो शनिवार को एक उच्च-स्तरीय दल के साथ इस्लामाबाद पहुंचे थे, उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ गहन चर्चा की। हालांकि, इस मुलाकात के बाद ईरानी दल ने अपनी मांगों की एक सूची पाकिस्तानी नेतृत्व को सौंप दी और बिना किसी समझौते के वापस तेहरान के लिए रवाना हो गया। इस सूची में पूर्ण युद्ध समाप्ति के लिए ईरान की शर्तों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है।

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस इस उम्मीद में था कि ईरान बातचीत के नए प्रस्ताव पेश करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को शनिवार को ही इस्लामाबाद पहुंचना था, लेकिन ईरान के अड़ियल रुख ने अमेरिकी खेमे में भी अनिश्चितता पैदा कर दी है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इससे पूर्व बयान दिया था कि ईरान के पास एक 'बेहतरीन डील' करने का मौका है, बशर्ते वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अपने कदमों को पूरी तरह और सत्यापन योग्य तरीके से रोक दे। लेकिन अराघची ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट कर दिया कि ईरान के खिलाफ थोपे गए युद्ध और सीजफायर की शर्तों पर उनका देश अपने पुराने और सैद्धांतिक स्टैंड पर कायम है।

फिलहाल, इस्लामाबाद में जारी यह कूटनीतिक गतिरोध दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जहाँ एक तरफ तेहरान से कमर्शियल उड़ानें फिर से शुरू होना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा था, वहीं सीधी बातचीत से इनकार ने फिर से युद्ध के बादलों को गहरा कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका अपने वार्ताकारों को इस्लामाबाद भेजेगा या फिर यह कूटनीतिक कोशिश पूरी तरह से इतिहास के पन्नों में दब जाएगी। ईरान का यह सख्त तेवर दर्शाता है कि वह आने वाले समय में अपनी शर्तों पर ही मेज पर बैठेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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