US-Iran ceasefire पर क्रेडिट की जंग; Israel ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल
अमेरिका-ईरान सीजफायर का क्रेडिट ले रहे पाकिस्तान को इजरायल ने आईना दिखाया। राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

मानचित्र में बाएं तरफ इजरायल के राजदूत रूवेन अजार है और दाएं ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ है।
US Iran Ceasefire : पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सशर्त युद्ध-विराम (सीजफायर) की खबर आई, तो दुनिया ने राहत की सांस ली। लेकिन इस कूटनीतिक जीत का श्रेय लेने की होड़ ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ जहां इसे अपनी सरकार की ऐतिहासिक सफलता बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक तीखा बयान देकर पाकिस्तान के इन दावों की हवा निकाल दी है। इजरायल ने साफ तौर पर कहा है कि वह पाकिस्तान को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता।
पाकिस्तान का दावा: 'वैश्विक मध्यस्थ' के रूप में उदय
बुधवार, 8 अप्रैल को सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इस्लामाबाद में प्रेस से बात करते हुए पाक विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ बेहद उत्साहित नजर आए। उन्होंने इस समझौते को पाकिस्तान के नेतृत्व की बड़ी कूटनीतिक विजय करार दिया। आसिफ का कहना है कि अब दुनिया इस्लामाबाद को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर देख रही है। उनके मुताबिक, न केवल पड़ोसी ईरान और अरब देशों ने, बल्कि अमेरिका ने भी पाकिस्तान की काबिलियत पर भरोसा जताया है। पाकिस्तान का मानना है कि इस मध्यस्थता के बाद देश एक 'नए युग' में प्रवेश कर चुका है, जहां क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी भूमिका निर्णायक होगी।
इजरायल का पलटवार: पाकिस्तान सिर्फ एक मजबूरी?
हालांकि, पाकिस्तान के इस जश्न पर इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने कड़ा प्रहार किया है। अजार ने पाकिस्तान की भूमिका पर गहरा संदेह जताते हुए कहा कि उसे किसी भी स्तर पर भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। इजरायली राजदूत ने तर्क दिया कि अमेरिका ने शायद अपने निजी और रणनीतिक कारणों से पाकिस्तान का इस्तेमाल संदेशवाहक के तौर पर किया होगा। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने पहले भी कतर और तुर्की जैसे 'समस्याग्रस्त' देशों का उपयोग हमास के साथ बातचीत के लिए किया है। इजरायल का मानना है कि पाकिस्तान का इस्तेमाल करना अमेरिका की एक कूटनीतिक जरूरत हो सकती है, न कि पाकिस्तान की अपनी कोई बड़ी योग्यता।
कूटनीतिक गलियारों में उठते सवाल :
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की असली स्थिति पर बहस छेड़ दी है। आधिकारिक सूत्रों और कूटनीतिक विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि:
- क्या पाकिस्तान केवल अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने वाला एक 'डाकिया' मात्र है?
- क्या पाकिस्तान इस सीजफायर का इस्तेमाल अपनी गिरती अंतरराष्ट्रीय साख को बचाने के लिए कर रहा है?
- इजरायल का रुख स्पष्ट करता है कि वह क्षेत्र में किसी भी ऐसे समझौते को संदेह की दृष्टि से देखता है जिसमें पाकिस्तान जैसे देशों की भागीदारी हो।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
