अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल; आतंक के 'मैन्युफैक्चरिंग हब' का कच्चा चिट्ठा हुआ उजागर
अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने पाकिस्तान के 14 आतंकी संगठनों और 'ऑपरेशन सिंदूर' के झूठ का पर्दाफाश किया। साक्ष्यों के साथ बेनकाब हुआ पाक का आतंक-निर्यात चेहरा।

US Congress Report on Pakistan Terrorism : आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर वैश्विक मंच पर बेनकाब हो गया है। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 25 मार्च को जारी की गई एक विस्फोटक रिपोर्ट ने उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिनमें पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता रहा है। इस रिपोर्ट ने प्रमाणित कर दिया है कि पड़ोसी मुल्क न केवल आतंकियों को पनाह दे रहा है, बल्कि वह भारत समेत पूरी दुनिया में अस्थिरता फैलाने के लिए 'आतंकवाद का निर्यात' करने वाला मुख्य केंद्र बना हुआ है।
अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की सरजमीं पर वर्तमान में 14 खूंखार आतंकी संगठन सक्रिय रूप से फल-फूल रहे हैं। इनमें भारत को निशाना बनाने वाले हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के साथ-साथ अल कायदा, अल कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) जैसे वैश्विक आतंकी गुट भी शामिल हैं। रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अकेले ISKP के ही 4000 से 6000 आतंकी पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाई जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पाकिस्तान की फितरत रही है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव में 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे दिखावे की कार्रवाई कर दुनिया को गुमराह करता है। वह दावा करता रहा है कि लश्कर और जैश जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। अमेरिकी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि:
लश्कर-ए-तैयबा: पाकिस्तान में इस समय 1000 से ज्यादा भारत विरोधी आतंकी सक्रिय हैं।
जैश-ए-मोहम्मद: करीब 500 से अधिक प्रशिक्षित आतंकी भारत में घुसपैठ की फिराक में तैयार बैठे हैं।
हिजबुल मुजाहिदीन: लगभग 1500 आतंकियों का जत्था पाकिस्तानी सरजमीं से सीधे तौर पर संचालित हो रहा है।
यह आतंक परस्ती कोई नई घटना नहीं है; रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि साल 1970 से ही पाकिस्तान की मशीनरी इन विषधरों को पालने और उन्हें प्रशिक्षण देने में जुटी है। विडंबना यह है कि हर बार रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय बेशर्मी की चादर ओढ़कर अपने नागरिकों और आतंकियों को पहचानने से इनकार कर देता है।
हालिया उदाहरण 22 फरवरी का है, जब किश्तवाड़ में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों—अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह, चौधरी मतबीर हुसैन और अब्दुल घनी को ढेर किया था। हालांकि पाकिस्तान ने इन्हें 'स्वतंत्रता सेनानी' और भारत का नागरिक बताया, लेकिन साक्ष्यों ने पाकिस्तान के झूठ के किले को ढहा दिया। आतंकी सैफुल्लाह का शिनाख्ती कार्ड (CNIC नंबर: 13101-9237685-1), जो अक्टूबर 2022 में जारी हुआ था, उसे पाकिस्तान के एबटाबाद का निवासी सिद्ध करता है। उसके परिवार के 10 सदस्य आज भी एबटाबाद में ही रह रहे हैं। ठीक इसी तरह पहलगाम के 'ऑपरेशन महादेव' में मारे गए आतंकी बिलाल अफजल, हबीब ताहिर और हनन जफर के पाकिस्तानी नागरिक होने के दस्तावेजी सबूतों ने भी दुनिया को पाकिस्तान की असलियत दिखाई है।
अमेरिकी कांग्रेस की यह रिपोर्ट महज एक दस्तावेज नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस दोहरी रणनीति पर करारा प्रहार है, जिसके तहत वह एक तरफ शांति का राग अलापता है और दूसरी तरफ अपनी धरती पर आतंक की फसल उगाता है। यह साफ हो चुका है कि अब पाकिस्तान के प्रपंच और झूठ का असर वैश्विक समुदाय पर बेअसर साबित हो रहा है और उसे अपनी इन कारस्तानियों का हिसाब देना ही होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
