वॉशिंगटन/नई दिल्ली: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध की आग अब सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को अपनी चपेट में लेने लगी है। होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के तट के समीप अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए भीषण हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य तनातनी के बीच अमेरिका द्वारा भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाए जाने की इस घटना ने दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों और क्वाड गठबंधन की दुहाई देने वाले मंचों पर इस घटना के बाद गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, जिसने राजनयिक गलियारों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने ओमान के तट के पास रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर चौबीस भारतीय नागरिकों को लेकर जा रहे 'सेटेबेलो' नामक कमर्शियल ऑयल टैंकर पर घातक हवाई हमला किया। इस अचानक और तीव्र हमले में जहाज के एक हिस्से में भारी तबाही हुई, जिसके कारण चालक दल में शामिल तीन भारतीय नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद सैन्य कार्रवाई में जान गंवाने वालों में भारत के तेईस वर्षीय युवा नाविक आदित्य शर्मा भी शामिल हैं, जिनकी असामयिक मृत्यु ने देश को झकझोर कर रख दिया है। हमले के तत्काल बाद चले बचाव अभियान में चालक दल के अन्य इक्कीस सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस सैन्य आक्रामकता ने समुद्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है।

यह कोई अकेली घटना नहीं है; अमेरिका ने महज तीन दिनों के भीतर दो बार उन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है जिनमें भारतीय नागरिक तैनात थे। 'सेटेबेलो' पर हुए इस हमले से ठीक दो दिन पहले अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने 'मैरीवेक्स' नामक एक अन्य व्यापारिक जहाज पर भी इसी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन से उड़ान भरने वाले एक एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने मैरीवेक्स जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग कंपार्टमेंट को निशाना बनाते हुए एक सटीक मिसाइल हमला किया था। हालांकि, मैरीवेक्स पर हुए हमले में राहत की बात यह रही कि उसमें सवार सभी चौबीस भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन इसके तुरंत बाद दूसरे जहाज पर हुआ घातक हमला अमेरिकी इरादों पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

भारत में इस घटना को लेकर चौतरफा गुस्सा और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने अमेरिकी नौसेना के उन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि मैरीवेक्स और सेटेबेलो के क्रू ने उनके द्वारा जारी सैन्य निर्देशों का पालन नहीं किया था। संघ का स्पष्ट कहना है कि जहाजों के चालक दल को समुद्र में किसी भी प्रकार की रेडियो चेतावनी या निर्देश प्राप्त नहीं हुए थे, जिसके कारण वे इस अप्रत्याशित हमले का शिकार बन गए। भारत सरकार के केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनेवाल ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा को हर हाल में पुख्ता करने की प्रतिबद्धता जताई है।

राजनयिक स्तर पर भारत ने इस मुद्दे को बेहद आक्रामकता से उठाया है। नई दिल्ली ने बुधवार को अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में तलब किया और ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर बेहद कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए डेमार्श जारी किया। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन हमलों में निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान जा रही है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रवैया बेहद ढीठ और असंवेदनशील बना हुआ है। ट्रंप ने इन हमलों के लिए कोई खेद प्रकट करने या गलती मानने के बजाय अमेरिकी सार्वजनिक मंचों पर इस सैन्य कार्रवाई को अपनी सेना की एक बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसने भारतीय पक्षों को और अधिक नाराज कर दिया है।

वैश्विक मामलों के कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह मनमानी न केवल भारत-अमेरिका के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र को भी कमजोर करेगी। अमेरिका द्वारा अपनी गलती न मानने के इस रवैये से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि हिंद महासागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में लागू होने वाले क्वाड सहयोग, आईएमपीडीए (IMPDA) और आईएफसी-आईओआर (IFC-IOR) जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सुरक्षा समझौतों की जमीनी हकीकत और अहमियत आखिर क्या रह गई है। यदि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और मित्र देशों के नागरिकों को ही सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल सकती, तो इन वैश्विक मंचों की प्रासंगिकता पर भविष्य में संकट गहराना तय है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story