ईरान की धरती से अमेरिकी पायलट का सफल रेस्क्यू; देखें पूरी कहानी।
ईरान में भीषण गोलीबारी के बीच अमेरिकी सेना का महा-रेस्क्यू; राष्ट्रपति ट्रंप ने जांबाज कर्नल को सुरक्षित बचाया। जानें ईरान-अमेरिका युद्ध की सबसे बड़ी खबर।

ईरान के दुर्गम क्षेत्रों में लापता हुए अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन का एक सांकेतिक चित्रण। यह चित्र केवल समझाने के उद्देश्य से AI द्वारा तैयार किया गया है।
US Army rescue pilot from Iran : ईरान और अमेरिका के बीच मंडराते युद्ध के काले बादलों के बीच एक ऐसी घटना घटी है जिसने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। ईरान की दुर्गम पहाड़ियों और दुश्मन की भीषण गोलीबारी के बीच अमेरिकी सेना ने अपने एक लापता जांबाज कर्नल को सुरक्षित बाहर निकालकर इतिहास रच दिया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था, जहाँ एक तरफ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) उस पायलट की जान के प्यासे थे, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी वायुसेना के दर्जनों घातक विमान आसमान से आग बरसाते हुए अपने साथी को बचाने के लिए मौत से खेल रहे थे। इस सफल अभियान के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे साहसी और असाधारण अभियानों में से एक करार दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शुक्रवार, 3 अप्रैल को हुई, जब कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे एक अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान को ईरानी सेना ने अपना निशाना बनाया। विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर ईरानी सीमा के भीतर जा गिरा। हालांकि एक पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा, लेकिन विमान के दूसरे क्रू मेंबर, जो एक सम्मानित कर्नल हैं, लापता हो गए थे। उनके ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में गिरे होने की सूचना मिलते ही स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने न केवल इलाके की घेराबंदी की, बल्कि उस अमेरिकी जांबाज को जिंदा पकड़ने के लिए 60,000 डॉलर से अधिक के इनाम की घोषणा कर दी। स्थानीय लोगों को भी इस खोज अभियान में शामिल किया गया था, जिससे पायलट पर खतरे का साया हर पल गहराता जा रहा था।
जैसे-जैसे समय बीत रहा था, दुश्मन के कदम उस बहादुर योद्धा की ओर बढ़ते जा रहे थे। लेकिन दुर्गम पहाड़ियों में छिपा वह कर्नल अकेला नहीं था। वॉशिंगटन में कमांडर-इन-चीफ, युद्ध सचिव और ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष पल-पल की निगरानी कर रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों लड़ाकू विमानों को ईरान की सीमा में झोंक दिया। भीषण गोलीबारी और भारी प्रतिरोध के बावजूद, अमेरिकी कमांडो ने एक बेहद जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अपने साथी को ईरान के जबड़े से सुरक्षित निकाल लिया। राष्ट्रपति ने राष्ट्र के नाम संबोधन में गर्व के साथ घोषणा की कि उनका 'बहादुर योद्धा' अब सुरक्षित है और अमेरिकी सेना अपने किसी भी सदस्य को पीछे न छोड़ने के संकल्प पर अडिग है।
इस सफल रेस्क्यू ने जहाँ अमेरिकी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अभियान के तुरंत बाद ईरान के खिलाफ अपने तेवर और कड़े कर दिए हैं। उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस समय सीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला गया और कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को भीषण परिणाम भुगतने होंगे। यह घटनाक्रम न केवल सैन्य पराक्रम की कहानी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के उस मोड़ की ओर इशारा कर रही है जहाँ एक छोटी सी चिंगारी विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
