ईरान दहला! 3 घंटे तक बरसते रहे अमेरिकी बम,ऑपरेशन पूरा होने के बाद हमलों को रोकने का किया ऐलान|
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के संचार और हवाई सुरक्षा ठिकानों पर तीन घंटे तक किए सटीक हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर।

अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक के बाद उठता धुएं का गुबार (बाएं) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएं)।
वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाते हुए उसके कई सामरिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। हालांकि, हमलों के इस ताजा दौर को अंजाम देने के बाद अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन की समाप्ति और हवाई हमलों को फिलहाल रोकने की घोषणा की है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि कमांडर-इन-चीफ के सीधे निर्देशों के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की निरंतर बढ़ती आक्रामकता को नियंत्रित करना था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह सैन्य अभियान पूरी तरह से सफल रहा है और निर्धारित लक्ष्यों को ध्वस्त करने के बाद बलों को वापस हाई अलर्ट पर रखा गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सैन्य अभियान लगभग तीन से साढ़े तीन घंटे तक लगातार जारी रहा। भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के लगभग तीन बजे इस ऑपरेशन की शुरुआत हुई थी, जिसकी पुष्टि स्वयं CENTCOM ने सोशल मीडिया पर की थी। इसके बाद सुबह करीब साढ़े छह बजे एक अन्य आधिकारिक बयान जारी कर हमलों के दौर के पूरा होने की घोषणा की गई। इस उच्च-स्तरीय हवाई हमले में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स, वायु सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के भीतर उसकी सैन्य निगरानी क्षमताओं, महत्वपूर्ण संचार प्रणालियों और हवाई सुरक्षा ठिकानों (एयर डिफेंस साइट्स) को पूरी सटीकता के साथ निशाना बनाया।
पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई ईरान की उन गतिविधियों के विरोध में की गई है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान के ये ठिकाने न केवल क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा खतरा बन चुके थे, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को भी गंभीर रूप से चुनौती दे रहे थे। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसी हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच यह तीसरी बार आमने-सामने की सैन्य भिड़ंत दर्ज की गई है।
इस बड़े हमले की पृष्ठभूमि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस हालिया चेतावनी से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने तेहरान को सख्त लहजे में आगाह किया था। ट्रंप ने कहा था कि दोनों देशों के बीच रुकी हुई कूटनीतिक बातचीत के लिए तेहरान को भारी कीमत चुकानी होगी। ट्रंप की इस धमकी के तुरंत बाद अमेरिकी सेना को सैन्य कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। नवनियुक्त रक्षा अधिकारी पीट हेगसेथ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका बमों के जरिए बातचीत का मार्ग प्रशस्त करेगा और तेहरान को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत झुकाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस बड़े हमले के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। ईरान की ओर से दावा किया गया था कि हमलों के नए दौर के कारण वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला हुआ है और कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।
इस सैन्य कार्रवाई से ठीक पहले ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल दागे थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने यह भीषण पलटवार किया है। वर्तमान में दोनों ओर से बढ़ते हमलों के कारण मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और कूटनीतिक वार्ता के जरिए युद्ध को टालने के वैश्विक प्रयास पूरी तरह पटरी से उतरते दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने भी इस अमेरिकी कार्रवाई का कड़ा जवाब देने की धमकी दी है, जिससे क्षेत्र में पूर्ण पैमाने पर युद्ध भड़कने की आशंका और अधिक गहरा गई है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
