भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की प्रतिनिधि सभा द्वारा रूस और ईरान को प्रतिबंधित करने वाले ‘लिंडसे ओ. ग्राहम अधिनियम, 2026’ को मंजूरी दिए जाने पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। इस नए अमेरिकी विधेयक के तहत राष्ट्रपति को रूस पर प्रतिबंध लगाने और रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले साझीदार देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। इस भू-राजनीतिक हलचल के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के नागरिकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने दो टूक शब्दों में कहा है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में इस कानून के पारित होने का संज्ञान ले लिया है और स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखी है। भारत वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों और अपनी ऊर्जा जरूरतों के आधार पर विभिन्न स्रोतों से आयात जारी रखेगा, जैसा कि पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है। पिछले कुछ महीनों में इस विषय पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है।

भारतीय पक्ष ने अमेरिका के सामने यह बात बहुत स्पष्ट रूप से रख दी है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों और शुल्कों के संभावित असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा। भारत ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के अपने संकल्प को दोहराया है। किसी भी संभावित चुनौती या बाहरी दबाव के असर से निपटने के लिए सरकार भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर लगातार काम कर रही है, ताकि देश की आर्थिक और ऊर्जा स्थिरता पूरी तरह सुरक्षित बनी रहे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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