Cockroach Janata Party Rise : भारतीय राजनीति के पारंपरिक मंच को चुनौती देते हुए सोशल मीडिया पर उपजे एक अभूतपूर्व डिजिटल आंदोलन ने देश के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। हाल ही में गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के अचानक हुए तीव्र उभार और इसके लाखों फॉलोअर्स की प्रामाणिकता को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज कुछ ही दिनों के भीतर देश के करोड़ों युवाओं को अपने साथ जोड़ने वाले इस डिजिटल पेज को लेकर अब सत्तापक्ष और विपक्ष के सोशल मीडिया रणनीतिकारों के बीच एक बड़ा वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर व्यंग्यात्मक मीम्स के जरिए शुरू हुआ यह अभियान अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसने मुख्यधारा की राजनीति को भी इस पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक कानूनी टिप्पणी के बाद हुई थी। गौरतलब है कि देश की एक अदालत में सुनवाई के दौरान एक न्यायाधीश द्वारा कुछ बेरोजगार युवाओं को कथित तौर पर 'कॉकरोच' कहे जाने के बाद, इस अपमान को एक हथियार बनाते हुए आगामी 16 मई, 2026 को सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक एक प्रतीकात्मक मंच की शुरुआत की गई थी। इस मंच ने देश में लगातार हो रही प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं की बेरोजगारी को अपना मुख्य मुद्दा बनाया। देखते ही देखते इस पेज ने 21 मिलियन (2.1 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स का एक विशाल आधार तैयार कर लिया, जिसमें सबसे बड़ी संख्या 18 से 24 वर्ष के भारतीय युवाओं की है। इस अभूतपूर्व और अस्वाभाविक रूप से तेज गति से बढ़े ग्राफ ने खुफिया एजेंसियों और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

इस अचानक आई डिजिटल लहर पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मंच के पीछे किसी विदेशी ताकतों या बॉट्स का हाथ होने की आशंका जताते हुए इसके फॉलोअर्स की प्रामाणिकता पर संदेह व्यक्त किया था। इस आधिकारिक संदेह का मुकाबला करने के लिए इस अभियान के मुख्य सूत्रधार और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने मोर्चा संभाला। दिपके ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से जुड़े प्रामाणिक इनसाइट्स और डेमोग्राफिक डेटा को सार्वजनिक कर दिया। इस डेटा रिपोर्ट के अनुसार, इस पेज को मिलने वाले कुल व्यूज का 94.7 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से घरेलू यानी भारतीय उपभोक्ताओं का है। इस खुलासे के जरिए उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें इस अभियान के पीछे पाकिस्तानी फॉलोअर्स या विदेशी फंडिंग होने की बात सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही थी।

इसके बावजूद, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू अपने रुख पर अडिग दिखाई दिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत के पास अपने ऊर्जावान और देशभक्त युवाओं की कोई कमी नहीं है, जो देश के विकास में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं। आधिकारिक स्तर पर इस बात की बारीकी से जांच की जा रही है कि क्या इस तरह के डिजिटल उभार के पीछे किसी प्रकार का सुनियोजित एल्गोरिदम हेरफेर शामिल है या यह वाकई युवाओं का एक वास्तविक असंतोष है। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों और सोशल मीडिया की गाइडलाइंस के तहत भी डेटा की सत्यता को परखा जा रहा है, क्योंकि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का एक मंच पर आना भारतीय इंटरनेट इतिहास की सबसे विरल घटनाओं में से एक है।

डिजिटल स्पेस में चल रहा यह दांव-पेंच इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में राजनीति की दिशा और दशा सोशल मीडिया के ट्रेंड्स तय करने वाले हैं। एक अदालती टिप्पणी से उपजा यह गुस्सा आज देश के नीति-निर्माताओं के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो चुका है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के वास्तविक घरेलू समर्थन के दावों और सरकार की इस पर टिकी पैनी नजरों के बीच, यह विवाद केवल फॉलोअर्स की संख्या तक सीमित नहीं रह गया है। यह घटना दर्शाती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यदि युवाओं की बुनियादी चिंताओं जैसे रोजगार और परीक्षा की शुचिता को समय रहते नहीं संभाला गया, तो डिजिटल मीडिया का एक छोटा सा मीम भी सत्ता के बड़े-बड़े प्राचीरों को हिलाने की क्षमता रखता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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