diwali unesco list india 2025 : नई दिल्ली में आयोजित UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर समिति की वार्षिक बैठक में भारत के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की गई। देश के सबसे प्रमुख और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक, दिवाली, को आधिकारिक रूप से ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’ की सूची में शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है और यह उपलब्धि देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।

दिल्ली के लाल किले परिसर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में विश्वभर से आए सदस्य देशों ने परंपरागत सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों पर विचार-विमर्श किया। कुल 67 वैश्विक नामांकन प्रस्तावों में से दिवाली को शामिल करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें सत्र का उद्घाटन भारत के UNESCO राजदूत विशाल वी. शर्मा ने किया। समिति ने दिवाली को न सिर्फ एक धार्मिक त्योहार बल्कि सामाजिक सहभागिता, सामुदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक विविधता के अद्वितीय प्रतीक के रूप में मान्यता दी।

इस घोषणा के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान का ऐतिहासिक क्षण बताया। उनका कहना था कि दिवाली का UNESCO सूची में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति विश्व समुदाय के बीच अपनी विशिष्ट पहचान कायम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दिवाली भारतीय जीवन और मूल्यों के केंद्र में स्थित त्योहार है, जो प्रकाश, ज्ञान और धर्म के मार्ग का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक मान्यता मिलने से यह सण पूरे विश्व में और अधिक लोकप्रिय होगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी परंपराएँ सुरक्षित रहेंगी।

UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में सम्मिलित परंपराओं का उद्देश्य लोकआस्था, त्योहारों, संगीत, कला एवं सांस्कृतिक विधाओं को संरक्षित करना है। इस सूची में शामिल होने से किसी परंपरा को वैश्विक संरक्षण मिलता है, साथ ही उसके दस्तावेजीकरण, अध्ययन और प्रचार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रयास किए जाते हैं। अभी तक 150 देशों की कुल 788 परंपराएँ इस सूची में मौजूद हैं और भारत की ओर से दिवाली का शामिल होना सूची में उसकी सांस्कृतिक उपस्थिति को और मजबूत बनाता है।

भारत के अब तक 15 विभिन्न सांस्कृतिक तत्त्व UNESCO की अमूर्त धरोहर में शामिल हो चुके हैं, जिनमें कुंभ मेला, बंगाल की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा, योग, रामलीला और वैदिक मंत्रोच्चार जैसी प्राचीन परंपराएँ शामिल हैं। दिवाली के जुड़ने से यह सूची और समृद्ध हुई है और भारत की सांस्कृतिक विविधता का विस्तार वैश्विक स्तर पर और भी उज्ज्वल हो उठा है।

दिवाली की इस नई अंतरराष्ट्रीय मान्यता ने न केवल भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि सहस्राब्दियों से चली आ रही भारतीय परंपराएँ आज भी विश्व समुदाय के लिए प्रेरणा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह उपलब्धि उस सांस्कृतिक आत्मा को वैश्विक स्वर देती है, जो हर दीपक की लौ में उजाला, आशा और नई शुरुआत का संदेश समेटे हुए है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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