उज्जैन में बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, 60 फीट की गहराई में जिंदगी और मौत की जंग
मध्यप्रदेश के उज्जैन में 3 साल का बच्चा खुले बोरवेल में समाया, एनडीआरएफ और प्रशासन द्वारा ऑक्सीजन सप्लाई के साथ बचाव कार्य तेज।

उज्जैन जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बोरवेल में गिरे मासूम को बचाने के लिए बचाव कर्मियों और ग्रामीणों द्वारा टॉर्च की रोशनी में की जा रही सामूहिक कोशिश।
मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक बार फिर खुले छोड़े गए मौत के गड्ढे ने एक मासूम की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। जिले के एक ग्रामीण इलाके में खेलते समय 3 साल का मासूम बच्चा अचानक 60 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने युद्ध स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मासूम की सलामती के लिए दुआओं का दौर तेज हो गया है, वहीं रेस्क्यू टीमें बच्चे तक सुरक्षित पहुंचने के लिए आधुनिक उपकरणों की मदद ले रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदय विदारक घटना उस समय हुई जब मासूम अपने घर के समीप ही खेल रहा था। पास ही में स्थित एक खेत में बोरवेल का गड्ढा खुला हुआ था, जो इस अनहोनी का कारण बना। बच्चे के गिरने की आवाज सुनते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर दौड़े, लेकिन तब तक मासूम गहराई में ओझल हो चुका था। तत्काल स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को सूचित किया गया, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन का आगाज हुआ। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चा लगभग 60 फीट की गहराई पर अटका हुआ है। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई न हो।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बल और एनडीआरएफ की टीमें समानांतर गड्ढा खोदने की रणनीति पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों और अर्थमूवर्स (JCB) को काम पर लगाया गया है ताकि बच्चे तक पहुंचने के लिए एक सुरंग बनाई जा सके। घटनास्थल पर मेडिकल टीम को भी तैनात किया गया है और सीसीटीवी कैमरों की मदद से बोरवेल के भीतर बच्चे की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। रात के अंधेरे में भी काम निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए भारी फ्लड लाइटों का प्रबंध किया गया है। ग्रामीणों की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है।
विधिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सर्वोच्च न्यायालय ने खुले बोरवेलों को लेकर पहले ही सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी अनुपयोगी या चालू बोरवेल को खुला छोड़ना एक दंडनीय अपराध है और इसके लिए संबंधित जमीन के मालिक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उज्जैन की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की सतर्कता और ग्रामीण क्षेत्रों में बोरवेल सुरक्षा मानकों के कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर किन परिस्थितियों में बोरवेल को असुरक्षित तरीके से खुला छोड़ा गया था।
फिलहाल पूरी एकाग्रता मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। प्रत्येक बीतते मिनट के साथ बचाव दलों के लिए चुनौती बढ़ती जा रही है, क्योंकि जमीन के नीचे मिट्टी धंसने का खतरा बना रहता है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और रेस्क्यू कार्य में बाधा न डालें। यह घटना न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि विकास की अंधी दौड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। यदि समय रहते इन 'मौत के कुओं' को बंद नहीं किया गया, तो भविष्य में भी मासूम जिंदगियां इसी तरह दांव पर लगती रहेंगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
