आखिर क्यों गूगल को लेकर उदय कोटक ने भारतीय कंपनीयों को दी चेतावनी ? जानें पूरी रिपोर्ट
दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने गूगल द्वारा फंड जुटाने और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर भारतीय कॉरपोरेट जगत को भविष्य के प्रति आक्रामक निवेश करने की सलाह दी है।

मुंबई में आयोजित सीआईआई (CII) के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से व्यापार जगत को संबोधित करते कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक, जिन्होंने हाल ही में भारतीय कंपनियों को वैश्विक तकनीकी बदलावों के प्रति सचेत किया है।
Uday Kotak warning to Indian companies : दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां आज लिए जा रहे रणनीतिक फैसले ही भविष्य की वैश्विक दिशा तय करेंगे। वर्तमान दौर में टेक्नोलॉजी, पूंजी और निवेश का खेल पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक, तेज और निर्मम हो चुका है। इसी बदलते परिदृश्य के बीच तकनीकी दिग्गज कंपनी गूगल द्वारा उठाया गया एक हालिया कदम वैश्विक बाजार सहित भारतीय व्यापार जगत में गहरी हलचल पैदा कर रहा है। जिस कंपनी के पास पहले से ही नगदी का भारी भंडार मौजूद है और जिसने लगातार मुनाफे के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वही कंपनी अब बाजार से अतिरिक्त अस्सी अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में है। भारत के दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बड़े घटनाक्रम की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए देसी कंपनियों को बेहद कड़े शब्दों में सचेत किया है कि आईपीएल का मनोरंजन और खुमार अब खत्म हो चुका है, इसलिए देश के कॉरपोरेट जगत को तत्काल अपने सुनहरे भविष्य की तरफ देखना शुरू कर देना चाहिए।
गूगल के वित्तीय आंकड़े किसी को भी हैरत में डालने के लिए काफी हैं। कंपनी का सालाना मुनाफा लगभग एक सौ साठ अरब डॉलर है, जबकि महज एक तिमाही का मुनाफा बासठ अरब डॉलर दर्ज किया गया है। इसके साथ ही गूगल की कुल मार्केट वैल्यू साढ़े चार खरब डॉलर के आंकड़े को छू रही है, जो इतनी विशाल है कि भारत के पूरे निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी इसकी बराबरी नहीं की जा सकती। ऐसे में उदय कोटक का यह सवाल भारतीय बाजार के लिए अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि जब इतनी मजबूत स्थिति वाली वैश्विक कंपनी भविष्य की अनिश्चितताओं और एआई जैसी नई तकनीकों को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है, तो भारतीय कंपनियां और नीति-निर्माता किस स्तर की दूरदर्शिता और तत्परता दिखा रहे हैं। भारत की मौजूदा स्थिति को करीब से देखने पर एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला विरोधाभास साफ तौर पर सतह पर आ जाता है।
एक तरफ देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता और सत्ता की ताकत अपने चरम पर दिखाई देती है, जहां मजबूत नेतृत्व, लगातार चुनावी सफलताएं और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसा माहौल है, जिससे मोदी सरकार पूरी तरह मजबूत और अडिग नजर आती है। लेकिन दूसरी तरफ, देश के आर्थिक मोर्चे पर कई ऐसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं जिन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन है। पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध की विभीषिका ने इन चुनौतियों को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों को भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट की बात आसानी से स्वीकार नहीं होती और वे तुरंत तर्क देने लगते हैं कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हमारी जीडीपी विकास दर छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। मगर हकीकत के पन्नों को पलटने पर यह चमक थोड़ी धुंधली पड़ने लगती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो इस समय नाइजर और इथियोपिया जैसे देशों की जीडीपी वृद्धि दर भारत से भी अधिक है।
इसके अलावा, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी के मामले में भी भारत दुनिया में आठवें स्थान पर है और इस मोर्चे पर पड़ोसी देश बांग्लादेश हमसे आगे निकल चुका है। पश्चिम एशिया के संकट और अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते भारतीय रुपया पिछले एक साल के भीतर लगभग बारह प्रतिशत तक टूट चुका है, और यह लगातार सातवां साल है जब भारतीय मुद्रा में गिरावट का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह अपने आप में एक बेहद अजीब और जटिल आर्थिक स्थिति है, जहां देश के भीतर महंगाई पूरी तरह काबू में है, चालू खाता घाटा भी पूरी तरह संतुलित है और विकास की रफ्तार भी सामान्य दिख रही है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू मुद्रा लगातार कमजोर होती जा रही है। किसी भी देश के आर्थिक विकास का असली और सबसे बड़ा इंजन निजी निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश होता है, क्योंकि यही निवेश देश में आधुनिक टेक्नोलॉजी लाता है, बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन का एक मजबूत हिस्सा बनाता है।
Google which is cash surplus, just announced an additional capital raise of $80 bn.
— Uday Kotak (@udaykotak) June 2, 2026
Google annual profit is $160 bn, last quarter $62 bn, and market cap $4.5 trillion. That is close to total profits and market cap of all Indian listed companies put together.
It’s a wake up call…
वर्तमान में भारत सरकार ने बजट के भीतर विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के लिए ग्यारह लाख करोड़ रुपए का एक विशाल प्रावधान जरूर किया है, लेकिन केवल सरकारी निवेश के भरोसे इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं बनाया जा सकता। गूगल के वैश्विक उदाहरण और भारतीय कॉरपोरेट जगत की मानसिकता की तुलना करने पर यह अंतर बिल्कुल साफ हो जाता है। वैश्विक कंपनियां यह भली-भांति मानकर चल रही हैं कि आने वाला भविष्य बेहद अनिश्चित है, जहां तकनीकी बदलाव बहुत तेजी से होंगे, इसलिए वे अभी से अपनी पूंजी और निवेश को आक्रामक रूप से बढ़ा रही हैं। इसके विपरीत, भारत के भीतर अक्सर यह आत्मसंतुष्टि वाली धारणा दिखाई देती है कि हमारा बाजार इतना विशाल है कि वैश्विक निवेशक खुद-ब-खुद यहां खिंचे चले आएंगे, जबकि कड़वी हकीकत यह है कि कोई भी बड़ा निवेशक केवल बाजार देखकर नहीं, बल्कि नीतिगत भरोसे और बेहतर रिटर्न की पुख्ता गारंटी मिलने पर ही अपनी पूंजी लगाता है।
हालांकि, सीआईआई की हालिया रिपोर्ट यह बताती है कि निजी क्षेत्र ने सितंबर के महीने में सात दशमलव सात लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो निश्चित रूप से एक सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत है। परंतु यदि पिछले पूरे एक दशक के व्यापक आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो भारतीय कॉरपोरेट निवेश देश की जीडीपी के महज बारह प्रतिशत के स्तर पर आकर पूरी तरह स्थिर हो गया है, जिसे वैश्विक महाशक्तियों से मुकाबला करने के लिए हर हाल में बढ़ाना होगा। भारत के पास वर्तमान में एक विशाल घरेलू बाजार, ऊर्जावान युवा आबादी, तेजी से विकसित होता डिजिटल इकोसिस्टम और दुनिया के मंच पर एक मजबूत रणनीतिक स्थिति मौजूद है। अब समय आ गया है कि देश इन सभी स्वाभाविक फायदों को केवल दावों में रखने के बजाय धरातल पर एक वास्तविक, ठोस और अजेय आर्थिक ताकत के रूप में तब्दील करे, ताकि भविष्य की इस वैश्विक तकनीकी होड़ में भारत कहीं पीछे न छूट जाए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
