भोपाल। मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में कानून का शिकंजा कसने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल केस के आरोपियों की जेल के भीतर की जिंदगी की परतें सामने आने लगी हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद अदालत द्वारा १४ दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों मुख्य आरोपियों—ट्विशा की सेवानिवृत्त जज सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे अपने शुरुआती १८ घंटे बिताए हैं। कभी न्याय की कुर्सी पर बैठकर बंदियों को सजा सुनाने वाली पूर्व जज और उनके बेटे की जेल डायरी के पन्ने अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक गहन चर्चा का विषय बन गए हैं।

जेल प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम ठीक ५ बजे दोनों आरोपियों को सुरक्षा के कड़े घेरे में भोपाल सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार से भीतर लाया गया। जेल मैनुअल के नियमों के तहत सबसे पहले कारागार के चिकित्सालय में दोनों का अनिवार्य मेडिकल चेकअप किया गया, जिसमें मां और बेटे दोनों ही शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और फिट पाए गए। इसके बाद पहचान की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए जेल रिकॉर्ड में दर्ज किया गया कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह को अब 'कैदी नंबर ७१' की नई पहचान मिली है, जबकि उनके बेटे समर्थ सिंह को 'आमद नंबर १७८२' आवंटित किया गया है। दोनों को आम कैदियों की तरह ही एक-एक स्टील की थाली, कटोरी और बिछाने के लिए सामान्य सूती चादर मुहैया कराई गई।

शाम ६ बजे जेल के नियमों के मुताबिक बैरकों में बंदियों के लिए रात के भोजन का वितरण शुरू हुआ। जेल सूत्रों ने बताया कि पहली रात दोनों आरोपियों को सामान्य कैदियों की तरह ही कढ़ी-पकौड़े और रोटियां परोसी गईं। पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी सामान्य डाइट ली और भोजन करने के बाद वे महिला विंग के मेडिकल वार्ड में स्थित अपनी बैरक में बेहद बेफिक्र होकर सो गईं। इसके विपरीत, पुरुष विंग के बैरक नंबर-४ में बंद ट्विशा के पति समर्थ सिंह की स्थिति इसके बिल्कुल उलट रही। अपनी पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के कानूनी फंदे में फंसे समर्थ के चेहरे पर तनाव और घबराहट साफ देखी जा सकती थी, जिसके चलते वह रातभर बैरक के फर्श पर करवटें बदलता रहा और उसे ठीक से नींद भी नहीं आई।

बुधवार की सुबह होते ही सेंट्रल जेल परिसर में उस समय हलचल तेज हो गई, जब इस परिवार का बड़ा बेटा सिद्धार्थ सिंह अपनी मां और छोटे भाई से मुलाकात करने जेल पहुंचा। जेल नियमों के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सिद्धार्थ ने सबसे पहले बैरक नंबर-४ का रुख किया, जहां उसने अपने छोटे भाई समर्थ से मुलाकात कर उसे कानूनी लड़ाई का ढांढस बंधाया। इसके बाद वह महिला विंग के मेडिकल वार्ड की तरफ गया, जहां उसने अपनी मां गिरिबाला सिंह से मिलकर मामले की प्रगति और उनके स्वास्थ्य के संदर्भ में बातचीत की। जेल प्रशासन ने इस मुलाकात को पूरी तरह से नियमानुसार और तय समय सीमा के भीतर ही संपन्न कराने की बात कही है।

इससे पहले, जब इन दोनों रसूखदार आरोपियों को भोपाल की जिला अदालत में पेश किया गया था, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अदालत परिसर के पिछले गेट से दोनों को कोर्ट रूम के भीतर प्रवेश कराया था। अदालती कार्यवाही के दौरान खुद रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्विशा के वकीलों पर आरोप लगाया था कि वे इस संवेदनशील मामले का जानबूझकर 'मीडिया ट्रायल' करवा रहे हैं ताकि उनके परिवार की सामाजिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचाई जा सके। बहरहाल, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को १४ दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और सीबीआई की विशेष टीम अब इस संदिग्ध मौत के रहस्यमयी आखिरी पन्नों को खंगालने में जुटी है, ताकि सच को सामने लाया जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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