जब न्याय के मंदिर में गूंजे हास्य के ठहाके-सॉलिसिटर जनरल की किताब ने कोर्टरूम ड्रामे में घोला हास्य का तड़का।
सॉलिसिटर जनरल की पुस्तकों के विमोचन पर चीफ जस्टिस ने साझा किए हास्यप्रद किस्से, गृह मंत्री ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को रेखांकित किया।

विमोचन समारोह में हाथ जोड़कर अभिवादन करते महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और गृह मंत्री अमित शाह।
देश की राजधानी दिल्ली के एक गरिमामय समारोह में भारत के न्यायिक और प्रशासनिक जगत के दिग्गजों का जमावड़ा हुआ, जहां अवसर था भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की नई पुस्तकों के विमोचन का। इस विशेष अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए न केवल न्यायपालिका की गरिमा को रेखांकित किया, बल्कि कोर्ट रूम से जुड़े ऐसे हास्यप्रद किस्से साझा किए जिन्होंने पूरे सभागार को ठहाकों से भर दिया। समारोह में मुख्य न्यायाधीश का संबोधन किसी औपचारिक भाषण से कहीं अधिक एक आत्मीय संवाद की तरह रहा, जिसमें उन्होंने सॉलिसिटर जनरल की लेखन प्रतिभा और उनके समय प्रबंधन पर चुटीले अंदाज में सवाल किए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि तुषार मेहता द्वारा लिखित इन दो किताबों को एक के बाद एक पढ़ना किसी ऐसे कोर्टरूम ड्रामा को लगातार देखने जैसा है, जो गलती से किसी स्टैंड-अप स्पेशल में पहुंच गया हो। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे-जैसे वे इन किताबों के पन्ने पलटते गए, उनके मन में निरंतर यह जिज्ञासा बनी रही कि सॉलिसिटर जनरल जैसे व्यस्ततम व्यक्ति को, जो हर समय कानूनी उथल-पुथल के बीच घिरे रहते हैं, इतना गहरा और हास्यपूर्ण लिखने का समय कैसे मिला। मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि शायद तुषार भाई ने ईश्वर से दिन में पच्चीसवें घंटे की गुहार लगाई होगी और उस अतिरिक्त समय को विशेष रूप से अपनी लेखन कला के लिए सुरक्षित रख लिया होगा।
इस विमोचन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शिरकत की और भारतीय लोकतंत्र की सशक्त यात्रा पर अपने विचार साझा किए। गृह मंत्री ने कहा कि 1947 से आज तक भारत की बहुदलीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था लगातार मजबूत हुई है और देश की संवैधानिक यात्रा ने लोकतंत्र की जड़ों को गहराई तक पहुंचाया है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत के भीतर संसद और विधानसभाओं के माध्यम से जितने भी सत्ता परिवर्तन या कानून में बदलाव हुए, उन्हें देश की जनता ने बिना एक बूंद खून बहाए और बिना किसी हिंसा के स्वीकार किया। अमित शाह के अनुसार, भारतीय लोकतंत्र की यह सहज स्वीकृति ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल पेश करती है।
समारोह के दौरान विधिक और राजनीतिक क्षेत्र के बीच एक अनूठा तालमेल देखने को मिला, जहां कानूनों की जटिलताओं के बजाय साहित्य, हास्य और राष्ट्र निर्माण की चर्चा मुख्य केंद्र रही। कार्यक्रम का समापन एक ऐसे सकारात्मक संदेश के साथ हुआ जिसमें न्यायपालिका की संवेदनशीलता और कार्यपालिका के दृढ़ संकल्प का संगम दिखाई दिया। सॉलिसिटर जनरल की यह कृतियां न केवल कानूनी जगत के छात्रों के लिए बल्कि आम पाठकों के लिए भी कोर्टरूम की बारीकियों को समझने का एक रोचक माध्यम बनेंगी। यह आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि गंभीर कानूनी विमर्श के बीच भी मानवीय संवेदनाएं और हास्य की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
