प्रधानमंत्री कमला प्रसाद ने विदेश मंत्री जयशंकर की उपस्थिति में की घोषणा, भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के संघर्ष को दी जाएगी नई पहचान।

पोर्ट ऑफ स्पेन के तट से दूर पारिया की खाड़ी में स्थित नेल्सन द्वीप, जो कभी हजारों भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के लिए अनिश्चितता और संघर्ष का पहला पड़ाव हुआ करता था, अब अपनी पहचान बदलने जा रहा है। त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की उपस्थिति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक घोषणा करते हुए कहा कि इस द्वीप का नाम बदला जाएगा। यह कदम उन हजारों भारतीय पूर्वजों के प्रति एक आधिकारिक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अमानवीय परिस्थितियों में इस देश के निर्माण में अपना पसीना और रक्त बहाया।

इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा 9 मई को उस समय हुई जब प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर एक स्मारक पट्टिका के अनावरण समारोह के लिए वाटर टैक्सी के माध्यम से नेल्सन द्वीप पहुंचे। प्रधानमंत्री बिसेसर ने इस प्रक्रिया को व्यवस्थित और लोकतांत्रिक बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की स्थायी सचिव नताशा बैरो की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया है। यह समिति नेशनल ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करेगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नया नाम तय करने के लिए जनता के साथ गहन परामर्श किया जाएगा, ताकि यह राष्ट्र के वास्तविक इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को प्रतिबिंबित कर सके।

समारोह के दौरान प्रधानमंत्री कमला प्रसाद ने एक अत्यंत मर्मस्पर्शी भाषण दिया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को इतिहास के उन काले पन्नों की याद दिला दी। उन्होंने कहा कि भारत से आए वे बंधुआ मजदूर अपने साथ केवल कुछ कपड़े नहीं, बल्कि रामायण, गीता और कुरान जैसे पवित्र ग्रंथ और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना लेकर आए थे। प्रधानमंत्री ने उस समय की अमानवीय 'गिरमिटिया' व्यवस्था की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'मानव तस्करी' का ही एक रूप बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हमारे पूर्वज अंग्रेजी नहीं जानते थे और उन जटिल अनुबंधों को समझने की स्थिति में नहीं थे, जिनके तहत उन्हें इस नई दुनिया में लाया गया था, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत से अपनी पहचान बनाई।

ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, नेल्सन द्वीप 1866 से 1917 तक भारतीय प्रवासियों के लिए एक इमिग्रेशन और क्वारंटाइन स्टेशन के रूप में कार्य करता था। इस द्वीप पर लंगर डालने वाला पहला जहाज 'हंबर' था, जो 473 भारतीयों को लेकर आया था। आज त्रिनिदाद और टोबैगो की कुल 14 लाख की आबादी में से लगभग 42 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं। यह द्वीप उन संघर्षों का गवाह है जहां भारतीयों को 'काला पानी' पार करने के बाद पहली बार भूमि नसीब हुई थी।

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की उपस्थिति इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और त्रिनिदाद के प्रगाढ़ संबंधों के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है। नाम बदलने का यह निर्णय न केवल एक भौगोलिक पहचान को बदलेगा, बल्कि यह औपनिवेशिक दासता के प्रतीकों को हटाकर एक ऐसी पहचान स्थापित करेगा जो आत्म-सम्मान और साझा विरासत पर टिकी हो। यह घोषणा त्रिनिदाद के भारतीय समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जो उनकी जड़ों और उनके पूर्वजों के अदम्य साहस को वैश्विक मंच पर मान्यता प्रदान करती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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