सफलता के शिखर पर नकिता, पर नियति ने छीनी सांसे: 93.80% अंक लाने वाली बेटी की अधूरी दास्तां

श्रीगंगानगर, राजस्थान:

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा घोषित 12वीं कक्षा के परिणामों ने जहाँ प्रदेश भर में हजारों घरों में खुशियां बिखेरी हैं, वहीं श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र से एक ऐसी खबर आई है जिसने हर किसी की आंखें भिगो दी हैं। यह कहानी है 7 KND गांव की एक होनहार छात्रा नकिता की, जिसने अपनी मेहनत से इतिहास तो रचा, लेकिन वह अपनी इस कामयाबी को खुद देख न सकी।

नकिता की शानदार सफलता: पीईईओ क्षेत्र में किया टॉप

31 मार्च, मंगलवार को जैसे ही 12वीं कला वर्ग (Arts) का परिणाम जारी हुआ, नकिता का नाम मेरिट सूची में चमक उठा। नकिता ने 93.80 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया, बल्कि पूरे पीईईओ (PEEO) क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की इस छात्रा ने सरकारी संसाधनों के बीच रहकर अपनी पढ़ाई को जिस मुकाम पर पहुँचाया, वह मिसाल है।

रिजल्ट से 11 दिन पहले हुआ दुखद अंत

इस बड़ी कामयाबी के बीच सबसे हृदयविदारक तथ्य यह है कि नकिता अब इस दुनिया में नहीं है। जिस सफलता का उसे और उसके परिवार को बेसब्री से इंतजार था, उससे ठीक 11 दिन पहले यानी 20 मार्च को नियति ने उसे छीन लिया। नकिता की मेहनत की गवाही आज उसकी मार्कशीट दे रही है, लेकिन उस मार्कशीट को हाथ में पकड़ने वाली नकिता की सांसें पहले ही थम चुकी थीं।

बीमारी से संघर्ष और मजदूर पिता की बेबसी

नकिता एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसके पिता मंगल सिंह एक दिहाड़ी मजदूर हैं और मां चरणजीत कौर गृहिणी हैं। संसाधनों के अभाव के बावजूद नकिता के सपने बड़े थे। शिक्षकों के अनुसार, वह स्वभाव से शांत और बेहद अनुशासित थी।

दुखद मोड़ तब आया जब नकिता अचानक पीलिया और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गई। एक मजदूर पिता ने अपनी लाडली को बचाने के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी। उसे बेहतर इलाज के लिए बीकानेर के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद विधाता को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान ही नकिता जिंदगी की जंग हार गई।

जब घर पहुंची मार्कशीट: फूट-फूट कर रोया परिवार

मंगलवार को जब स्कूल का स्टाफ और ग्रामीण नकिता के घर उसका रिजल्ट लेकर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। जिस बेटी के स्वागत की तैयारी होनी चाहिए थी, उसकी तस्वीर के सामने उसकी 'गोल्डन' मार्कशीट रखी गई।

93.80 प्रतिशत का स्कोर कार्ड देखकर माता-पिता के सब्र का बांध टूट गया। पिता मंगल सिंह और मां चरणजीत कौर अपनी बिटिया की कामयाबी को देख फफक पड़े। गांव वालों का कहना है कि जिस बेटी की सफलता का जश्न पूरे गांव को मनाना था, आज उसकी मार्कशीट परिवार के लिए ताउम्र का दर्द बन गई है।

शिक्षकों की भावुक यादें

नकिता के स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने भारी मन से बताया कि वह विद्यालय की सबसे होनहार छात्राओं में से एक थी। वह भविष्य में कुछ बड़ा बनकर अपने परिवार की गरीबी दूर करना चाहती थी। शिक्षकों ने कहा, "नकिता ने साबित कर दिया कि अभावों में भी प्रतिभा चमकती है, लेकिन हमें इस बात का ताउम्र मलाल रहेगा कि वह अपनी इस उपलब्धि की खुशी हमारे साथ साझा नहीं कर सकी।"

एक सबक और संवेदना

नकिता की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। उसकी 93.80 प्रतिशत की मार्कशीट केवल अंकों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक बेटी के संघर्ष, एक पिता के त्याग और एक अधूरे सपने की दास्तां है। आज पूरा श्रीगंगानगर इस होनहार बेटी को नम आंखों से याद कर रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story