धोलेरा स्मार्ट सिटी का निर्माण धोलेरा इंडस्ट्रियल सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड (DICDL) द्वारा किया जा रहा है और इसका क्षेत्रफल लगभग 920 वर्ग किलोमीटर है, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा नियोजित औद्योगिक क्षेत्र बन रहा है। पहले चरण में 153 वर्ग किलोमीटर एरिया को विकसित किया जा रहा है, जिसमें उन्नत सड़कें, स्मार्ट ग्रिड, अंडरग्राउंड यूटिलिटी नेटवर्क और पुनर्चक्रित जल जैसी ज़रूरी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। यह बड़ा प्रोजेक्ट 2043 तक छह फेज़ में पूरा होना प्रस्तावित है।



धोलेरा की सबसे अहम विशेषता इसकी बढ़िया कनेक्टिविटी बनने जा रही है। अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यहाँ पहुँचना आसान हो जाएगा। साथ ही यह क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे यहाँ औद्योगिक यातायात और लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी। रेल और बस नेटवर्क को भी मज़बूत किया जा रहा है।

तकनीकी दृष्टि से सबसे बड़ी उपलब्धि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर प्लांट की है, जिसमें दिसंबर 2026 तक उत्पादन शुरू होने की संभावना है। ये प्लांट न केवल स्वदेशी चिप निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि पावरचिप (ताइवान) और टोक्यो इलेक्ट्रॉन (जापान) के साथ मिलकर अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करेगा। यह प्रोजेक्ट भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता देने और वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

Tata Semiconductor Plant, Dholera


धोलेरा नवीकरणीय ऊर्जा में भी अग्रणी बनने जा रहा है—यहाँ 5000 मेगावाट क्षमता वाला विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनाया जा रहा है, जिसमें अदाणी ग्रीन, एसजेवीएन और टाटा पावर जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। इस योजना से स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर ऊर्जा ज़रूरतें पूरी होंगी, हज़ारों रोजगार मिलेंगे और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' के तहत बड़े पैमाने पर निवेश भी हो रहा है।

इतिहास की दृष्टि से भी यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है—पास का लोथल प्राचीन हड़प्पा सभ्यता का हिस्सा था और वहाँ का डॉकयार्ड संभवतः विश्व का सबसे पुराना डॉक रहा है। आज धोलेरा का विकास आधुनिक भारत की नई पहचान को दर्शाता है, जिसमें तकनीक, हरित ऊर्जा और योजनाबद्ध शहरीकरण का समावेश है।

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Kush Goyal

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