पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर, क्या अब धमकियों से डरेगी सागरिका घोष की बुलंद आवाज?
राज्यसभा में टीएमसी की उपनेता सागरिका घोष ने तीन संदिग्ध नंबरों से कॉल आने की जानकारी दी और पुलिस से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और उपनेता सागरिका घोष नई दिल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ।
देश की राजधानी में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेत्री और राज्यसभा में पार्टी की उपनेता सागरिका घोष को अज्ञात हमलावरों द्वारा फोन पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां मिली हैं। इस सनसनीखेज घटना ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। सागरिका घोष ने इस पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक करते हुए देश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है।
सागरिका घोष ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से खुलासा किया कि उन्हें बीते शाम तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से धमकी भरे कॉल आए। पत्रकारिता की दुनिया में तीन दशकों का लंबा अनुभव रखने वाली और वर्तमान में संसद के उच्च सदन में अपनी पार्टी का सशक्त प्रतिनिधित्व करने वाली घोष ने बताया कि ट्रू-कॉलर ऐप के जरिए उन्होंने इन संदिग्ध कॉलर्स की पहचान कर ली है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दीपक वृजवासन, जयशंकर भट्टाचार्य और गुरप्रीत नामक व्यक्तियों के नंबर साझा किए हैं, जिन्होंने उन्हें डराने और धमकाने का प्रयास किया।
इस घटना के बाद सागरिका घोष ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि वह इन नंबरों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने जा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन मामले की गंभीरता को समझते हुए अपराधियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करेगा। गौरतलब है कि सागरिका घोष केवल एक सांसद ही नहीं, बल्कि एक प्रख्यात लेखिका और वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की पत्नी भी हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनियों के माध्यम से अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। फरवरी 2024 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाली घोष राज्यसभा में सरकार को घेरने और बंगाल की संस्कृति व विरासत के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए जानी जाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषक इस घटना को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के हालिया नतीजों और सागरिका घोष द्वारा संसद में भाजपा को टैगों जयंती जैसे सांस्कृतिक समारोहों में अनुपस्थिति पर घेरने के बाद की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं। शनिवार को ही घोष ने आरोप लगाया था कि भाजपा सांसद बंगाल के नोबेल पुरस्कार विजेताओं का उपयोग केवल चुनावी स्वार्थ के लिए करते हैं, जबकि संसद के पुष्पांजलि समारोहों में वे नदारद रहते हैं। इस बयान के ठीक बाद मिली धमकियों ने मामले को और भी अधिक संवेदनशील बना दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी मौजूदा सांसद को धमकी देना भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत अपराध है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल और स्थानीय पुलिस द्वारा इन नंबरों की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जांच शुरू किए जाने की संभावना है। एक महिला सांसद के प्रति इस तरह का आक्रामक व्यवहार भारतीय राजनीति के गिरते स्तर और सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करता है। अब सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे कितनी जल्दी इन कॉल करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाते हैं। यह घटना स्पष्ट करती है कि वैचारिक मतभेदों के बीच व्यक्तिगत धमकियों के लिए सभ्य समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
