पश्चिम बंगाल में टीएमसी के दो विधायक निष्कासित; विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी गई चिट्ठी में 13 विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले की सीआईडी कर रही जांच।

TMC split West Bengal : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा भूचाल आ चुका है जिसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नींव को हिलाकर रख दिया है। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने राज्य से लेकर देश तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। दत्ता का दावा है कि ममता बनर्जी की पार्टी के करीब 50 विधायक इस समय एक सुर में बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं और एक गुप्त होटल में बैठक कर पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर कब्जा करने की रणनीति बना रहे हैं। यह महज एक आंतरिक कलह नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के दो-फाड़ होने की कगार पर पहुंचने की एक ज्वलंत कहानी बन चुकी है।

इस सियासी ड्रामे की शुरुआत तब और तेज हो गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को दो बागी विधायकों, रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इन दोनों विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर दावा किया था कि पार्टी के कुछ दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर जाली हैं। इस कार्रवाई के बाद आग में घी डालने का काम रिजू दत्ता के बयानों ने किया। दत्ता ने खुलासा किया कि रितब्रता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के लगभग 50 विधायक पहले एक होटल में एकजुट हुए, फोन पर लगातार संपर्क साधे रहे और फिर शाम को विधायक छात्रावास में एक बड़ी बैठक को अंजाम दिया। बागी खेमे की तैयारी इतनी पुख्ता है कि वे दो-तिहाई बहुमत का दावा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर तीन मुख्य मांगें रखने जा रहे हैं, जिसमें खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताना, शोभनदेब चट्टोपाध्याय की जगह रितब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित करना और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोकना शामिल है।

इस पूरे विवाद में अब एक गंभीर कानूनी और जांच का पहलू भी जुड़ गया है जो सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करता है। विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी गई जिस चिट्ठी को लेकर यह पूरा बवाल खड़ा हुआ है, उसमें करीब 13 विधायकों के जाली हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। तीन विधायकों ने सीआईडी (CID) के सामने साफ तौर पर कबूल किया है कि उस पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विधायक दल के नेता और मुख्य सचेतक की नियुक्ति वाली यह चिट्ठी खुद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखी थी, जिसके साथ विधायकों के हस्ताक्षर वाला पन्ना संलग्न था। इस जालसाजी की जांच अब सीआईडी कर रही है, जिसने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी को समन भेजा था। हालांकि, अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए और उन्होंने समय की मांग की है, जिसके बाद सीआईडी ने उन्हें 8 जून को दोबारा तलब किया है।

इस अभूतपूर्व संकट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और सांगठनिक फैसलों पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। निष्कासित प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि इस पूरे राजनीतिक पतन की जिम्मेदारी ममता और अभिषेक बनर्जी को लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन चेहरों को अभिषेक बनर्जी उंगली पकड़कर पार्टी में लाए थे, आज उन्हीं लोगों ने पीठ में छुरा घोंपा है। पार्टी के भीतर चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) और अभिषेक बनर्जी की कार्यप्रणाली को लेकर विधायकों में सुलग रहा असंतोष अब पूरी तरह से ज्वालामुखी बनकर फट चुका है।

पश्चिम बंगाल की सत्ता पर लंबे समय से एकछत्र राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परीक्षा की सबसे कठिन घड़ी है। यदि बागी खेमा 40 से अधिक विधायकों का समर्थन जुटाकर एक औपचारिक बैठक में नया नेता चुन लेता है, तो विधानसभा अध्यक्ष के सामने वास्तविक दल होने का दावा बेहद मजबूत हो जाएगा। यह घटनाक्रम न केवल ममता बनर्जी के राजनीतिक वर्चस्व को सीधी चुनौती दे रहा है, बल्कि बंगाल की भविष्य की राजनीति को एक नया और अप्रत्याशित मोड़ देने की ओर अग्रसर है, जिसका असर आने वाले कई सालों तक महसूस किया जाएगा।

Updated On 2 Jun 2026 2:55 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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