नई दिल्ली | 17 फरवरी, 2026

भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 'ग्लोबल एआई शिखर सम्मेलन' (Global AI Summit) को तकनीकी जगत में भारत की धाक जमाने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन, आयोजन के पहले ही दिन से सामने आ रही अव्यवस्था और कुप्रबंधन की खबरों ने वैश्विक मंच पर भारत की छवि को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों और विशेषज्ञों का मानना है कि जो आयोजन भारत की 'संस्थागत क्षमता' का प्रदर्शन होना चाहिए था, वह केवल एक 'व्यक्तित्व-आधारित' प्रचार (Personality-driven projection) बनकर रह गया है।

अव्यवस्था और प्रबंधन पर उठते सवाल

शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पहुंचे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रबंधन की कमी पर गहरी नाराजगी जताई है। सूत्रों के अनुसार, अतिथियों के प्रवेश, बैठने की व्यवस्था और तकनीकी सत्रों के तालमेल में भारी कमी देखी गई।

  • केंद्रीकरण का आरोप: कई लोगों का कहना है कि पूरे आयोजन का ध्यान केवल एक ही व्यक्ति के महिमामंडन पर केंद्रित कर दिया गया, जिससे जमीनी स्तर पर होने वाले आवश्यक कार्यों और सूक्ष्म प्रबंधन (Micro-management) की अनदेखी हुई।
  • वैश्विक छवि पर असर: दुनिया भर से आए तकनीकी दिग्गजों के बीच इस तरह का कुप्रबंधन भारत की उन महत्वाकांक्षाओं को ठेस पहुँचा सकता है, जिसके तहत देश खुद को 'ग्लोबल टेक हब' के रूप में स्थापित करना चाहता है।

"मैक्सिमम गवर्नेंस" बनाम जमीनी हकीकत

एक समय में देश को “Minimum Government, Maximum Governance” (न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन) का भरोसा दिलाया गया था। लेकिन आज के हालात को देखकर कई बुद्धिजीवी और नागरिक यह महसूस कर रहे हैं कि हम इसके ठीक उलट स्थिति देख रहे हैं।

  • अधिकतम सरकार: सरकारी नियंत्रण और प्रचार का दायरा हर क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है।
  • न्यूनतम शासन परिणाम: नीतियों के क्रियान्वयन और परिणामों के स्तर पर वह प्रभाव नजर नहीं आ रहा है जिसका वादा किया गया था।

संस्थागत मजबूती बनाम व्यक्तिगत ब्रांडिंग

शिखर सम्मेलन के विवाद ने इस पुराने मुद्दे को फिर से जीवित कर दिया है कि क्या भारत में संस्थाओं को मजबूत करने के बजाय केवल 'व्यक्तिगत ब्रांडिंग' पर जोर दिया जा रहा है?

  • संस्थाओं की भूमिका: किसी भी लोकतंत्र और उभरती अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत संस्थानों (जैसे IITs, रिसर्च काउंसिल और प्रशासनिक निकाय) का स्वतंत्र और सक्षम होना अनिवार्य है।
  • चिंता का विषय: जब किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का पूरा श्रेय और फोकस केवल एक चेहरे तक सीमित कर दिया जाता है, तो इससे लंबे समय में संस्थागत ढांचे को नुकसान पहुँचता है।

भारत को है बेहतर योजना की जरूरत

भारत जैसी विशाल और विविध अर्थव्यवस्था के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। हमारे पास बेहतरीन इंजीनियर, दूरदर्शी उद्यमी और कुशल नीति निर्माता हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • भारत को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो व्यक्तिगत ब्रांडिंग से ऊपर उठकर संस्थागत क्षमता को बढ़ावा दे।
  • भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए बेहतर योजना (Planning) और त्रुटिहीन निष्पादन (Execution) अनिवार्य होना चाहिए।


नई दिल्ली में चल रहा यह एआई शिखर सम्मेलन भारत के लिए एक आईना है। यह याद दिलाता है कि वैश्विक नेतृत्व की कुर्सी केवल प्रचार से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों और मजबूत व्यवस्थाओं से मिलती है। देश को गौरव केवल एक व्यक्ति के 'महिमामंडन' से नहीं, बल्कि एक ऐसी कार्यप्रणाली से मिलेगा जो पारदर्शी हो, जवाबदेह हो और जहाँ 'गवर्नेंस' के नतीजे जमीन पर दिखाई दें।

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