आत्मनिर्भर भारत- धोलेरा में गूंजेगी 'मेक इन इंडिया' की गूंज, टाटा-ASML की इस ऐतिहासिक साझेदारी ने रचा नया इतिहास!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी एएसएमएल के बीच धोलेरा फैब के लिए ९१,००० करोड़ रुपये का समझौता संपन्न।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और टाटा-एएसएमएल के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते को प्रदर्शित करता एक प्रतीकात्मक चित्र।
वैश्विक विनिर्माण और उच्च तकनीक के क्षेत्र में अपनी संप्रभुता स्थापित करने की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की आधिकारिक यात्रा के दौरान नीदरलैंड्स में भारत के औद्योगिक भविष्य को बदलने वाले एक युगांतरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। डच सेमीकंडक्टर दिग्गज एएसएमएल (ASML) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच हुआ यह समझौता ज्ञापन (MoU) न केवल भारत को वैश्विक चिप विनिर्माण के मानचित्र पर स्थापित करेगा, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को एक अभूतपूर्व ऊंचाई प्रदान करेगा। डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस समझौते ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इस रणनीतिक साझेदारी को गुजरात के धोलेरा में स्थापित हो रहे भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ९१,००० करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ देश का पहला सेमीकंडक्टर वेफर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही है।
इस रणनीतिक समझौते के दीर्घकालिक भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव होने तय हैं। सेमीकंडक्टर चिप को आधुनिक अर्थव्यवस्था का 'नया तेल' माना जाता है, जिसके बिना स्मार्टफोन से लेकर लड़ाकू विमानों तक का निर्माण असंभव है। एएसएमएल के साथ हुई यह डील भारत को दुनिया के सबसे उन्नत लिथोग्राफी समाधानों तक सीधी पहुंच प्रदान करेगी। एएसएमएल के शीर्ष अधिकारी क्रिस्टोफ फूके ने समझौते के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत के लिए सेमीकंडक्टर अब महज एक उद्योग नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है। टाटा समूह देश का पहला व्यावसायिक फैब स्थापित करने जा रहा है, और डच कंपनी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए उत्पाद, अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ मानव संसाधन के स्तर पर हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। यह सहयोग धोलेरा फैब को दुनिया के सबसे आधुनिक चिप निर्माण केंद्रों के समकक्ष खड़ा करने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारतीय युवाओं के स्वर्णिम भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की यह प्रगति देश की युवा प्रतिभाओं के लिए असीम अवसरों के द्वार खोलेगी। नई दिल्ली और एम्स्टर्डम के बीच हुई इस उच्च-स्तरीय वार्ता में केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि भविष्य की पूरी तकनीकी इकोसिस्टम को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों ने रणनीतिक कनेक्टिविटी के तहत भारतीय बंदरगाहों को नीदरलैंड के बंदरगाहों से जोड़ने, क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी पर संयुक्त रूप से काम करने तथा फ्यूचर टेक के अंतर्गत रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को उन्नत बनाने पर सहमति जताई है। इसके अतिरिक्त, डच कंपनियों ने भारत की विशाल मानव संसाधन क्षमता को पहचानते हुए 'ग्लोबल मोबिलिटी' और 'स्किल पार्टनरशिप' के माध्यम से भारत को एक वैश्विक 'टैलेंट इंजन' के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का इतिहास बेहद मजबूत रहा है। वर्तमान में ३०० से अधिक डच कंपनियां भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार हैं, जिससे नीदरलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक और यूरोप में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन चुका है। वित्त वर्ष २०२४-२५ में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार २७.८ अरब डॉलर के स्तर को छू चुका है, जबकि नीदरलैंड का भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ५५.६ अरब डॉलर रहा है। इस आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने डच व्यापारिक समुदाय को भारत में 'डिजाइन, इनोवेट और मैन्युफैक्चर' करने का खुला निमंत्रण दिया है। उन्होंने समुद्री क्षेत्र, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और हेल्थकेयर जैसे उभरते बाजारों में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। व्यापारिक सुगमता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को शीघ्र अति शीघ्र लागू करने की पुरजोर वकालत की, जो दोनों देशों को एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार के रूप में स्थापित करेगा।
इस ऐतिहासिक राजनयिक दौरे का एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ग्रीन हाइड्रोजन पर दोनों देशों का महत्वाकांक्षी संयुक्त रोडमैप है। भारत और नीदरलैंड मिलकर वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों को सुदृढ़ करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी सहयोग को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। इसके तहत यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप और संयुक्त रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे दोनों देशों के वैज्ञानिक और शोधकर्ता मिलकर वैश्विक ऊर्जा संकट का समाधान खोज सकें। एएसएमएल और टाटा के बीच का यह समझौता केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का वह मोड़ है जहां से देश डिजिटल युग की रीढ़ कहे जाने वाले सेमीकंडक्टर उद्योग में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा चुका है। धोलेरा में बनने वाली यह अत्याधुनिक फैब आने वाले दशकों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित करने और भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
