नई दिल्ली: वैश्विक इक्विटी बाजारों के समीकरणों में एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के मूल्यांकन के मामले में ताइवान के शेयर बाजार ने भारतीय शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया है। इस रणनीतिक बढ़त के साथ ही ताइवान अब संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद आधिकारिक तौर पर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। भारतीय शेयर बाजार जो लंबे समय से वैश्विक निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था, अब इस नई रैंकिंग में छठे स्थान पर खिसक गया है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तकनीकी क्षेत्र में आ रहे बदलावों ने इस बड़े बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार की है।

ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि ताइवान का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर $4.95 ट्रिलियन (लगभग 411 लाख करोड़ रुपये) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके विपरीत, घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहे भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्यांकन गिरकर $4.92 ट्रिलियन पर सिमट गया है। दोनों देशों के बाजारों के बीच आया यह मामूली लेकिन महत्वपूर्ण अंतर ताइवान की तकनीकी कंपनियों में विदेशी पूंजी के भारी निवेश को दर्शाता है। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्र के तीव्र विकास ने ताइवान के इक्विटी परिसंपत्तियों के मूल्य को अभूतपूर्व गति प्रदान की है।

ताइवान के शेयर बाजार को इस वैश्विक ऊंचाई पर स्थापित करने का मुख्य श्रेय दुनिया की सबसे बड़ी और अग्रणी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) को जाता है। ताइवान के बेंचमार्क स्टॉक इंडेक्स में अकेले इस तकनीकी कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है, जो घरेलू बाजार में इसके एकतरफा प्रभुत्व को रेखांकित करती है। एआई चिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग और हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला में एकाधिकार के चलते इस साल कंपनी के शेयरों में 49 प्रतिशत की भारी उछाल देखी गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेश चक्र इस समय पूरी तरह से एआई और हार्डवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर केंद्रित है, जिसके चलते जिन बाजारों में मजबूत तकनीकी हार्डवेयर कंपनियों की कमी है, वे ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों के सामने पिछड़ रहे हैं।

दूसरी ओर, मजबूत घरेलू व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे के बावजूद भारतीय शेयर बाजार इस साल लगातार दबाव की स्थिति से गुजर रहा है। बाजार विशेषज्ञों ने इसके पीछे पांच प्रमुख कारकों की पहचान की है। पहला कारण यह है कि वैश्विक संस्थागत निवेशकों ने भारत के अपेक्षाकृत महंगे और उच्च मूल्यांकन वाले बाजार से अपना मुनाफावसूली कर पैसा निकालना शुरू कर दिया है। ये निवेशक अब सीधे तौर पर एआई और सेमीकंडक्टर थीम पर दांव लगाने के लिए ताइवान और कोरिया जैसे बाजारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी क्रम में, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने चालू सत्र के दौरान भारतीय शेयर बाजारों से लगभग $24 बिलियन की भारी-भरकम पूंजी की शुद्ध बिकवाली की है।

इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों को वैश्विक स्तर पर प्रभावित किया है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिससे देश में मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास के परिदृश्य को लेकर चिंताएं गहरी हुई हैं। इन दबावों के चलते भारतीय शेयर बाजार का मुख्य सूचकांक इस वर्ष लगभग 8 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है, जो लगातार एक दशक की मजबूत बढ़त के बाद पहली संभावित वार्षिक गिरावट की ओर संकेत करता है। इस गिरावट के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में एमएससीआई (MSCI) इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का भारांश भी पिछले साल के 19 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 12 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है।

हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि भले ही शेयर बाजार के मूल्यांकन की इस तात्कालिक दौड़ में ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन जब बात वास्तविक धरातल और अर्थव्यवस्था के आकार की आती है, तो भारत का कद ताइवान के मुकाबले कई गुना बड़ा और अधिक सुरक्षित है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आधिकारिक आर्थिक अनुमानों के अनुसार, भारत की $4.15 ट्रिलियन की विशाल अर्थव्यवस्था ताइवान की $977 बिलियन की जीडीपी के मुकाबले काफी बड़ी और विविध है। यह दीर्घकालिक निवेशकों के लिए भारतीय बाजार की आंतरिक स्थिरता का एक मजबूत प्रमाण है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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