नई दिल्ली: बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच, पूरी दुनिया एक बार फिर 'धरती मां' के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए तैयार है। इस शनिवार, 28 मार्च 2026 को वैश्विक स्तर पर 'अर्थ ऑवर' (Earth Hour) मनाया जाएगा। देश की राजधानी दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली प्रमुख कंपनी बीएसईएस (BSES) ने अपने 53 लाख से अधिक ग्राहकों और लगभग 2.25 करोड़ उपभोक्ताओं से इस मुहिम का हिस्सा बनने की विशेष अपील की है।

क्या है BSES की अपील और समय?

बीएसईएस ने दिल्लीवासियों से आग्रह किया है कि वे शनिवार रात 8:30 बजे से 9:30 बजे के बीच अपने घरों, सोसायटियों और कार्यस्थलों की सभी गैर-जरूरी लाइटें और बिजली के उपकरणों को स्वेच्छा से बंद रखें। यह केवल एक घंटे का सांकेतिक कदम है, जो बिजली बचाने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश देता है।

दिलचस्प बात यह है कि बीएसईएस केवल जनता से अपील नहीं कर रही, बल्कि वह खुद भी मिसाल पेश करेगी। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने 400 से अधिक कार्यालयों में इस एक घंटे के दौरान सभी गैर-जरूरी लाइटों को स्विच ऑफ रखेगी।

अर्थ ऑवर: सिडनी से शुरू हुआ एक वैश्विक आंदोलन

'अर्थ ऑवर' वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) का एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से एक छोटे से सांकेतिक स्विच-ऑफ के रूप में हुई थी। आज, लगभग 20 वर्षों के बाद, यह पर्यावरण संरक्षण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें कैसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी बड़ी समस्याओं से लड़ने में मदद कर सकती हैं।

पिछले वर्षों में दिल्ली ने रचा इतिहास

दिल्ली के नागरिकों ने हमेशा से ही पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में अर्थ ऑवर के दौरान भारी मात्रा में बिजली की बचत हुई है:

  • साल 2024: दिल्लीवासियों ने एक घंटे में 206 मेगावाट बिजली बचाई थी।
  • साल 2025: यह आंकड़ा बढ़कर 269 मेगावाट तक पहुंच गया।

इस साल उम्मीद जताई जा रही है कि जागरूकता बढ़ने के कारण दिल्ली इस रिकॉर्ड को भी तोड़ देगी और ऊर्जा संरक्षण का नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।

जागरूकता के लिए डिजिटल और ग्राउंड अभियान

बीएसईएस इस मिशन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रही है। कंपनी ने अपने उपभोक्ता न्यूजलेटर 'संवाद' के जरिए 53 लाख परिवारों तक संदेश पहुंचाया है। इसके अलावा, एसएमएस (SMS), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के सहयोग से गली-मोहल्लों तक इस संदेश को फैलाया जा रहा है कि "एक घंटा पृथ्वी के नाम" देना क्यों जरूरी है।

दरअसल, अचानक बदलता मौसम, अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बरसात इस बात का संकेत हैं कि धरती संकट में है। बिजली के अत्यधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जो ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।

BSES और WWF इंडिया की साझीदारी

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (WWF) इंडिया ने अर्थ ऑवर के 20 साल पूरे होने पर बीएसईएस की सराहना की है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार, बीएसईएस एक दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभरा है जिसने न केवल एक घंटे के लिए लाइट बंद करने का संदेश दिया, बल्कि स्थायी जीवनशैली (Sustainable Lifestyle) को भी बढ़ावा दिया है।

बीएसईएस के प्रवक्ता ने कहा, "हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ एक घंटे तक सीमित नहीं है। हम स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। हमने अब तक 13,000 रूफटॉप सौर ऊर्जा कनेक्शन दिए हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 6,300 से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित किए हैं। दिल्ली के लिए बचाया गया हर मेगावाट एक हरित भविष्य की ओर बढ़ता कदम है।"

आप कैसे बन सकते हैं इस मुहिम का हिस्सा?

शनिवार, 28 मार्च को रात 8:30 बजे आप ये आसान कदम उठा सकते हैं:

  • कमरे की वे लाइटें बंद कर दें जिनकी उस समय जरूरत नहीं है।
  • एसी (AC) या भारी बिजली उपकरणों का उपयोग एक घंटे के लिए टाल दें।
  • मोमबत्ती जलाकर या बिना बिजली के परिवार के साथ समय बिताएं।
  • अपने आसपास के लोगों को भी इस स्विच-ऑफ के लिए प्रेरित करें।

अर्थ ऑवर केवल एक घंटे के लिए अंधेरा करने का नाम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के उजाले को सुरक्षित रखने का संकल्प है। आज हमारे द्वारा की गई बिजली की बचत ही आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और सुरक्षित पृथ्वी प्रदान करेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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