पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था के गलियारों में हलचल मचाने वाले हाई-प्रोफाइल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की आंच अब बिहार के बक्सर तक पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की नृशंस हत्या के मामले में राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बक्सर से दो युवकों को हिरासत में लिया है। इस अचानक हुई गिरफ्तारी ने न केवल इलाके में सनसनी फैला दी है, बल्कि आरोपियों के परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का स्पष्ट रूप से मानना है कि उनके बच्चों को इस गंभीर षड्यंत्र में बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वे पूरी तरह से निर्दोष हैं।

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल एसटीएफ की एक विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से बक्सर में छापेमारी की। पुलिस ने विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा नामक दो युवकों को उनके आवास से उठाया। विक्की मौर्य की मां नीलम देवी ने सिसकते हुए मीडिया को बताया कि उनका बेटा घर का सारा कामकाज संभालता था और किसी भी आपराधिक गतिविधि में उसकी संलिप्तता संभव ही नहीं है। परिजनों के अनुसार, पुलिस टीम जब घर आई थी, तब उन्होंने केवल एक घंटे की पूछताछ की बात कही थी, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी विक्की का कोई सुराग नहीं मिला। विक्की के पिता गौतम कुमार सिंह, जो एक दवा की दुकान चलाकर अपने परिवार का निर्वाह करते हैं, ने बताया कि उनका बेटा पूर्व में मुंबई में कार्यरत था और मयंक उसका केवल एक साधारण मित्र है।

वहीं, दूसरे आरोपी मयंक मिश्रा की पृष्ठभूमि को लेकर उसके दादा राज दयाल मिश्रा ने जानकारी दी कि मयंक के पिता जितेंद्र मिश्रा रांची में ठेकेदारी का कार्य करते हैं और मयंक अक्सर वहीं रहता था। बक्सर में वह केवल कभी-कभी ही आता था। पुलिस की इस दबिश ने पूरे गांव को चौंका दिया है क्योंकि दोनों युवकों की छवि स्थानीय स्तर पर शांत बताई जा रही है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान घर के सभी मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं, जिससे परिजनों का बाहरी दुनिया से संपर्क और सूचना प्राप्त करने का जरिया भी कट गया है।

कानूनी और जांच के पहलू से देखा जाए तो पुलिस को शक है कि 6 मई की रात को हुई चंद्रनाथ रथ की हत्या एक सुनियोजित 'सुपारी किलिंग' (Contract Killing) का परिणाम है। इस हत्या के पीछे किसी गहरे राजनीतिक या व्यक्तिगत रंजिश की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और संदिग्धों के मूवमेंट के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची हैं कि वारदात के तार बक्सर से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी सीधे प्रमाण या हथियार की बरामदगी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे परिजनों के आरोपों को बल मिल रहा है कि उनके बच्चों को गलत तरीके से फंसाया गया है।

यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दो राज्यों के पुलिस समन्वय और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठा रहा है। एक तरफ जहां एसटीएफ एक महत्वपूर्ण हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक गरीब परिवार अपने बेटे की बेगुनाही की गुहार लगा रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह स्पष्ट होगा कि क्या ये युवक वास्तव में इस जघन्य अपराध का हिस्सा थे या फिर पुलिस की कार्रवाई किसी गलत दिशा में मुड़ गई है। फिलहाल, बक्सर के इन परिवारों के लिए न्याय की प्रतीक्षा और अनिश्चितता का दौर जारी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story