प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड वाले बयान पर सुप्रिया श्रीनेत का तंज पड़ा भारी, सोशल मीडिया पर कांग्रेस हुई ट्रोल|
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा पर कांग्रेस नेता के तंज से सोशल मीडिया पर घिरीं सुप्रिया श्रीनेत, यूजर्स ने गणित और आलोचना पर उठाए सवाल।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उल्लेख किया था कि वे 30 वर्ष पूर्व न्यूजीलैंड आए थे, तब उन्हें कोई नहीं जानता था और उस समय उनके एक स्थानीय साथी ने उन्हें मफलर, टोपी और दस्ताने उपहार में दिए थे। इसी बयान के आधार पर सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री मोदी की जीवन यात्रा और उनके द्वारा साझा किए गए संघर्षों के गणित को लेकर तंज कसा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में 'अच्छे दिन' थे, जब भिक्षा मांगकर जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति भी न्यूजीलैंड की यात्रा करने में सक्षम थे।
कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री द्वारा अतीत में साझा की गई जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने 17 वर्ष की आयु तक चाय बेची और उसके बाद 35 वर्षों तक भिक्षा मांगकर जीवन व्यतीत किया, तो उस गणित के अनुसार 52 वर्ष की आयु तक वे इसी स्थिति में थे। श्रीनेत ने इसी कालखंड को प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा से जोड़ते हुए राजनीतिक टिप्पणी की। हालांकि, इस बयान के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं की ओर से तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सुप्रिया श्रीनेत के इस तर्क पर सवाल उठाते हुए उन्हें ही घेरे में ले लिया। कई उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि हर मुद्दे पर प्रधानमंत्री की आलोचना करना उचित नहीं है और इससे कांग्रेस पार्टी को ही नुकसान हो रहा है। एक उपयोगकर्ता ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि ऐसी नकारात्मक टिप्पणी से पार्टी के समर्थकों का भी मोहभंग होता है। वहीं, एक अन्य उपयोगकर्ता ने उनके द्वारा किए गए आयु के गणित पर सवाल उठाते हुए उसे तार्किक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया। उपयोगकर्ताओं का कहना था कि आलोचना करने के बजाय राजनीतिक ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए।
विभिन्न उपयोगकर्ताओं ने सुप्रिया श्रीनेत को यह भी याद दिलाया कि पूर्व में भी इस तरह की टिप्पणियों को लेकर वे विवादों में रही हैं। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने उन्हें सलाह दी कि वे अपनी पार्टी की छवि सुधारने की दिशा में काम करें, न कि केवल प्रधानमंत्री के बयानों पर अनावश्यक विवाद उत्पन्न करें। प्रतिक्रिया देने वाले लोगों में से कई ने प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज का समर्थन किया और कांग्रेस नेता के कटाक्ष को एक असफल राजनीतिक प्रयास बताया।
यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक बयानों पर जनता की पैनी नजर रहती है। प्रधानमंत्री मोदी पर किए गए इस कटाक्ष ने न केवल कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जनता अब राजनीतिक बयानों के पीछे के तथ्यों और तर्क की गंभीरता से जांच करती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर से मुख्यधारा की राजनीति में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नेताओं के प्रति जनता की बदलती सोच को स्पष्ट कर दिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
