Pawan Khera Supreme Court shock : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें एक बार फिर गंभीर मोड़ पर आ खड़ी हुई हैं। देश की शीर्ष अदालत ने उन्हें मिली अंतरिम राहत को तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से संबंधित स्थापित कानूनी सिद्धांतों और पुराने फैसलों की अनदेखी की है। इस फैसले के साथ ही अब पवन खेड़ा के लिए असम पुलिस की कार्रवाई का सामना करने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि अदालत ने उन्हें संबंधित असम की कोर्ट से ही जमानत मांगने का निर्देश दिया है।

कानूनी प्रक्रिया के इस नाटकीय घटनाक्रम में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील दी कि यह मामला कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है। उन्होंने तर्क दिया कि जब अपराध और एफआईआर दोनों असम में दर्ज हुए हैं, तो तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। आरोपी की ओर से हैदराबाद में अपनी पत्नी का घर होने का तर्क दिया गया था, जिसे सॉलिसिटर जनरल ने तथ्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि उनकी पत्नी भी दिल्ली में ही रहती हैं। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लिया कि किसी तीसरे राज्य में सहूलियत के आधार पर याचिका दाखिल करना न्याय प्रक्रिया को गुमराह करने जैसा है।

इस पूरे विवाद की जड़ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर है। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया था कि उनके पास तीन विदेशी पासपोर्ट और दुबई सहित विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 14 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। असम पुलिस की एक टीम पहले ही दिल्ली में उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे चुकी है, जिससे यह मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से काफी संवेदनशील हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में नोटिस जारी कर तीन सप्ताह बाद सुनवाई निर्धारित की है। तब तक के लिए हाईकोर्ट के सुरक्षात्मक आदेश पर रोक बनी रहेगी, जिसका अर्थ है कि खेड़ा को अब असम की निचली अदालतों का रुख करना होगा। यह घटनाक्रम न केवल एक नेता की व्यक्तिगत कानूनी लड़ाई है, बल्कि यह अधिकार क्षेत्र के कूटनीतिक इस्तेमाल और कोर्ट के समक्ष रखे जाने वाले तथ्यों की सत्यता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि असम पुलिस इस न्यायिक आदेश के बाद क्या कदम उठाती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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