नई दिल्ली। देश के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और जैव विविधता केंद्रों में से एक, अगस्त्यमलाई क्षेत्र को बचाने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में नवगठित थलपति विजय की सरकार को दो टूक सुनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि वन भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को तुरंत रोका जाए। अदालत ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर हजारों अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए एक व्यापक, चरणबद्ध और समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया है। इस मामले में सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि यहां बसे कुछ अतिक्रमणकारी पिछले कई दशकों से इस संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे हैं। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई आगामी २८ अगस्त को तय की गई है। गौरतलब है कि अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय ने हाल ही में १० मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जहां उनकी पार्टी तमिलगा वेट्टी कषगम ने कई सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है। सरकार गठन के महज २० दिनों के भीतर ही प्रशासन के सामने यह एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक चुनौती बनकर उभरा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त आदेश में प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित न होने की स्थिति में उच्च स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की बात कही है। पीठ ने तमिलनाडु सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताते हुए वन भूमि पर अतिक्रमण को बढ़ावा देने या उसमें संलिप्त पाए गए ११८ चिन्हित सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इन दोषी कर्मचारियों पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगा सकती है। साथ ही उन्हें क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के पास उचित पर्यावरण क्षतिपूर्ति और बहाली शुल्क जमा करने के लिए भी बाध्य किया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने तमिलनाडु सरकार के पुराने प्रयासों को केवल खोखले वादे करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि अब तक राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई स्थिति की गंभीरता और तात्कालिक जरूरत के मुताबिक पर्याप्त नहीं थी, जिसके कारण ही इस क्षेत्र में अतिक्रमण लगातार जारी रहा और समय के साथ बढ़ता चला गया। सर्वोच्च अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हालांकि इस विशाल क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना एक बेहद कठिन कार्य है, जिसमें बड़ी प्रशासनिक, रसद संबंधी और मानवीय जटिलताएं शामिल हैं, लेकिन इन चुनौतियों के बहाने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करने के संवैधानिक दायित्व को अनिश्चित काल के लिए टाला नहीं जा सकता।

अदालत ने सख्त लहजे में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार समयबद्ध और मंडलवार तरीके से अतिक्रमण हटाने की योजना को लागू करने में विफल रहती है, तो केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति इस कार्य को पूरा कराने के लिए वन क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की सिफारिश कर सकती है। इसके अलावा, कोर्ट ने मेगामलाई क्षेत्र और अन्य वन भूमियों में संचालित हो रहे सभी अवैध रिसॉर्ट्स और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने और उन्हें ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इस विध्वंस की प्रक्रिया के दौरान वन क्षेत्र में न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

जंगलों में अवैध बस्तियों को पूरी तरह हतोत्साहित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत अतिक्रमित वन क्षेत्रों में चल रही सभी कल्याणकारी योजनाओं, सार्वजनिक उपयोगिताओं, परिवहन सुविधाओं, बिजली की आपूर्ति और किसी भी प्रकार के बुनियादी ढांचागत सहायता के विस्तार पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि वन क्षेत्रों में स्थित सभी सरकारी प्रतिष्ठान, सुविधाएं और अनधिकृत बुनियादी ढांचे, जिनमें एसएमटीआर भी शामिल हैं, उन्हें छह महीने की अवधि के भीतर बंद कर दिया जाए, वहां से स्थानांतरित किया जाए या पूरी तरह ध्वस्त करके वन भूमि को मुक्त कराया जाए। अगस्त्यमलाई का ३,५०० वर्ग किलोमीटर का यह भूभाग तमिलनाडु और केरल में फैला हुआ है, जिसमें कन्याकुमारी वन्यजीव अभ्यारण्य, कलाकड़-मुंडनथुराई बाघ अभ्यारण्य, श्रीविल्लिपुथुर-मेगामलाई बाघ अभ्यारण्य और पेरियार बाघ अभ्यारण्य जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। यह पूरा इलाका बाघ, हाथी, तेंदुआ, भारतीय गौर, भालू और नीलगिरी लंगूर जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, जिसकी रक्षा के लिए कोर्ट का यह फैसला दूरगामी प्रभाव डालेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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