सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड में शोक, 3 दशक के संघर्ष के बाद JMM में बनाई थी खास पहचान
झारखंड सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है।

अस्पताल के बिस्तर पर झारखंड के दिवंगत कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू नजर आ रहे हैं|
झारखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन से झारखंड की राजनीति में शोक की लहर है। सुदिव्य कुमार सोनू के जाने को जेएमएम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उन्होंने करीब तीन दशक तक पार्टी से जुड़े रहकर एक सामान्य कार्यकर्ता से लेकर राज्य सरकार में मंत्री तक का सफर तय किया था। उनके निधन से पार्टी ने एक प्रमुख रणनीतिकार और संगठनकर्ता खो दिया, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने एक विश्वस्त साथी को खोया है।
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्राथमिक सदस्य के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 1992 में वह गिरिडीह नगर जेएमएम के संस्थापक अध्यक्ष बने। पार्टी में लंबे समय तक संगठन के स्तर पर काम करने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार गिरिडीह से जेएमएम के टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2014 में भी उन्होंने गिरिडीह से विधानसभा चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे।
लगातार राजनीतिक संघर्ष के बाद वर्ष 2019 में सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से पहली बार जीत हासिल की। इस जीत के साथ वह विधानसभा में पहुंचे और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका और मजबूत हुई। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधायक बने। 2024 में चुनाव जीतने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में शामिल होने के कारण सुदिव्य कुमार सोनू को सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली थी। वह उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग संभाल रहे थे। एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी के कारण सरकार में उनकी सक्रिय भूमिका बनी रही।
उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू ने जेपीएससी-जेएसएससी विवाद के दौरान छात्रों से बातचीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। छात्रों की नाराजगी, परीक्षाओं में सुधार और जांच से जुड़े मुद्दों पर सरकार के फैसलों की जानकारी छात्रों तक पहुंचाने में उन्होंने भूमिका निभाई। जेपीएससी-जेएसएससी की कई परीक्षाओं को रद्द करने, स्थगित करने और सीआईडी जांच से जुड़े मामलों में भी उनकी अहम भूमिका रही।
राजनीतिक हलकों में सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन के प्रभावशाली और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था। वह सरकार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते थे। उनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग होने के कारण सरकार के कामकाज में उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। पार्टी और समर्थकों के बीच भी उनकी राजनीतिक अहमियत थी। लंबे समय तक जेएमएम के साथ जुड़े रहने और संगठन से लेकर सरकार तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के कारण उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। करीब तीन दशक के राजनीतिक सफर के बाद उनका निधन जेएमएम और झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
